लखनऊ के दफ्तरों में लेक्टेशन रूम के नाम पर खानापूर्ति! कहीं ताला, कहीं शौचालय में बना दिया कमरा

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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बस अड्डों से सरकारी दफ्तरों तक महिलाओं को परेशानी, बच्चे को दूध पिलाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर ढकना पड़ता है आंचल

लखनऊ, अमृत विचार: मां बनने का अहसास हर महिला के लिए खास होता है। लेकिन सार्वजनिक जगहों पर बच्चे को दूध पिलाना उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है। सरकार और कोर्ट के सख्त आदेश हैं। इसके बावजूद लखनऊ के दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों से लेक्टेशन रूम गायब हैं। महिलाए अपने बच्चे की भूख मिटाने के लिए सार्वजिनक जगहों पर आपने आंचल में बच्चे को छुपाकर दुध पिलाने को मजबूर है।

चारबाग और आलमबाग बस अड्डों पर रोजाना हजारों महिलाएं आती हैं। यहां महिलाओं के लिए अलग से कोई फीडिंग रूम नहीं बना है। जहां एकाध जगह बने भी हैं, वहां ताला लटका रहता है। मजबूरी में महिलाओं को प्लेटफॉर्म पर दुपट्टा ढककर या गंदे शौचालयों में जाकर बच्चे को दूध पिलाना पड़ता है। वहीं कैसर बाग में एक लेक्टेशन रुम बना भी है तो उसमें सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है आसपास पुरुषों का जमावड़ा बना रहता है।

सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों का हाल भी खराब है। कलेक्ट्रेट, विकास भवन और तमाम बड़े महकमों में महिला कर्मचारियों के लिए कोई अलग से कमरा नहीं है। यही हाल गोमती नगर और विभूति खंड के ज्यादातर प्राइवेट दफ्तरों का है। नियम कहता है कि 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाले हर दफ्तर में यह सुविधा होनी चाहिए। लेकिन इस नियम का कोई पालन नहीं कर रहा है। शहर के पोस्ट ऑफिसों में शौचालयों को ही लेक्टेशन रूम बना दिया गया है। वहीं जीपीओ में एक क्रज है लेकिन वह भी न के बराबर है।

सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि बच्चे को दूध पिलाना महिला का मौलिक अधिकार है। किसी भी दफ्तर या बस अड्डे के अधिकारी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कागजों में योजनाएं पूरी हैं, लेकिन ज़मीन पर महिलाएं आज भी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रही हैं।

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