नीरज की एक सलाह और यशवीर का आखिरी थ्रो! 81.33 मीटर से सीधे ब्रॉन्ज तक ऐसे बदली बाजी

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Edited By Muskan Dixit
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मेडल की रेस से लगभग बाहर थे यशवीर सिंह, नीरज चोपड़ा ने बताया भाला सीधी लाइन में रखने का तरीका; आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर फेंककर जीता कांस्य

ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह ने आखिरी प्रयास में ऐसा कमाल किया, जिसने पूरे मुकाबले का रुख बदल दिया। एक समय 81.33 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर चल रहे यशवीर के लिए मेडल की उम्मीद लगभग खत्म होती नजर आ रही थी। तभी ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा की एक छोटी-सी सलाह उनके काम आई और आखिरी थ्रो में उन्होंने 85.41 मीटर की दूरी तय करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

नीरज की छोटी सी सलाह ने बदल दिया यशवीर का खेल

जैवलिन थ्रो में भाले की दिशा और उसे शरीर की सही लाइन में रखना बेहद अहम माना जाता है। यशवीर सिंह ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि आखिरी थ्रो से पहले नीरज चोपड़ा ने उन्हें भाला सीधी लाइन में रखने की सलाह दी थी।

नीरज की सलाह पर अमल करते हुए यशवीर ने भाले को कान के पास सही स्थिति में पकड़ा, कंधों को सामने की ओर सीधा रखा और हाथ को पीछे खींचकर उसी लाइन में ऊपर से भाला फेंका।

इस तकनीकी बदलाव का असर उनके आखिरी प्रयास में साफ दिखाई दिया। यशवीर ने 85.41 मीटर का शानदार थ्रो किया और सातवें स्थान से सीधे पदक की स्थिति में पहुंच गए। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा।

जब मेडल की उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी

मुकाबले के निर्णायक दौर से पहले यशवीर 81.33 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर थे। ऐसे समय में उनके सामने दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी।

लेकिन उन्होंने आखिरी प्रयास में अपनी तकनीक पर भरोसा किया और 85.41 मीटर का थ्रो करके कांस्य पदक पक्का कर लिया। यशवीर के इस प्रदर्शन के साथ भारत ने जैवलिन थ्रो में डबल पोडियम फिनिश हासिल की।

बोले यशवीर- मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था

कॉमनवेल्थ गेम्स से दिल्ली लौटने के बाद यशवीर ने बताया कि इस बड़े टूर्नामेंट में उन्हें खास दबाव महसूस नहीं हुआ। उनके मुताबिक, फैंस और मीडिया का मुख्य ध्यान नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम, रुमेश पथिरागे और एंडरसन पीटर्स जैसे बड़े नामों पर था।

यशवीर ने इसी स्थिति का फायदा उठाया और अपना पूरा ध्यान प्रदर्शन पर रखा। वह खुद को अपना 100 प्रतिशत देने और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते रहे।

किसने जीता जैवलिन में गोल्ड?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।

भारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज अपने नाम किया। इस तरह भारत ने इवेंट में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों पदक जीते।

वहीं पेरिस ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट पाकिस्तान के अरशद नदीम तीसरे राउंड के बाद ही प्रतियोगिता से बाहर हो गए। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 77.41 मीटर रहा और वह टॉप-8 में जगह नहीं बना सके।

यशवीर के लिए यह प्रदर्शन क्यों खास?

यशवीर सिंह का 85.41 मीटर का थ्रो न केवल कांस्य पदक दिलाने वाला प्रदर्शन रहा, बल्कि कठिन स्थिति में तकनीकी बदलाव को तुरंत लागू कर शानदार वापसी करने की मिसाल भी बना। खास बात यह रही कि उनके प्रदर्शन में नीरज चोपड़ा की सलाह और आखिरी प्रयास का संयोजन निर्णायक साबित हुआ।

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