RBI का बड़ा फैसला, अब बिना बताए घर नहीं आएगा रिकवरी एजेंट, बदले लोन वसूली के नियम
RBI ने लोन रिकवरी से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। अब रिकवरी एजेंट के घर आने से 24 घंटे पहले सूचना देना, कॉल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना और डराने-धमकाने पर रोक अनिवार्य होगी।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य ऋण देने वाली संस्थाओं के लिए ऋण वसूली (Loan Recovery) से जुड़े नए और सख्त नियम जारी किए हैं। नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य उधारकर्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा करना और रिकवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। नए नियमों के तहत अब रिकवरी एजेंट के पहली बार उधारकर्ता के घर जाने से कम से कम 24 घंटे पहले बैंक को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा। बैंक को एजेंसी का नाम और संपर्क नंबर भी उधारकर्ता के साथ साझा करना होगा।
बैंक की होगी पूरी जिम्मेदारी
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि रिकवरी एजेंसी या रिकवरी एजेंट के व्यवहार और कार्यों की पूरी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या ऋणदाता संस्था की होगी। साथ ही सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर नियुक्त रिकवरी एजेंसियों और एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी।
छह महीने तक सुरक्षित रखनी होगी कॉल रिकॉर्डिंग
नए नियमों के अनुसार, यदि रिकवरी एजेंट और उधारकर्ता के बीच फोन पर बातचीत होती है, तो उसकी रिकॉर्डिंग कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। यदि मामला अदालत में पहुंचता है, तो रिकॉर्डिंग को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखना होगा।
पहचान पत्र और प्राधिकरण पत्र जरूरी
आरबीआई ने निर्देश दिया है कि वसूली के दौरान बैंक कर्मचारी और रिकवरी एजेंट को अपना पहचान पत्र (आईडी कार्ड) दिखाना होगा। इसके अलावा एजेंट के पास बैंक या रिकवरी एजेंसी द्वारा जारी प्राधिकरण पत्र (Authorization Letter) होना चाहिए, जिसमें एजेंसी और शिकायत निवारण अधिकारी का संपर्क नंबर भी दर्ज हो।
उधारकर्ता की पसंद की जगह पर होगी मुलाकात
नए नियमों के मुताबिक, बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट उधारकर्ता या गारंटर से उनकी पसंद के स्थान पर ही मुलाकात करेंगे। यदि उधारकर्ता लगातार दो बार तय स्थान पर नहीं पहुंचता है, तभी रिकवरी एजेंट उसके घर या कार्यस्थल पर जा सकेंगे।
डराने-धमकाने पर पूरी तरह रोक
आरबीआई ने रिकवरी एजेंटों द्वारा अपनाए जाने वाले किसी भी कठोर या अपमानजनक तरीके पर सख्त रोक लगा दी है। इनमें शामिल हैं, गाली-गलौज या धमकी देना, बार-बार फोन या ब्लैंक कॉल करना। देर रात या अनुचित समय पर कॉल और मैसेज करना। सोशल मीडिया पर ऑडियो, वीडियो या निजी जानकारी साझा करना परिवार, दोस्तों या सहकर्मियों को परेशान करना। सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना। कर्ज न चुकाने के परिणामों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना।
बैंक बनाएंगे आंतरिक रिकवरी नीति
आरबीआई ने सभी बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे ऋण वसूली के लिए अपनी स्पष्ट आंतरिक नीति तैयार करें। इसमें यह भी तय होगा कि किस स्थिति में रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यदि रिकवरी प्रक्रिया के दौरान उधारकर्ता को किसी तरह का नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की होगी।
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