Rampur News : पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

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Edited By Pradeep Kumar
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शुक्रवार रात 12 बजे एक निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस

देश के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य और पूर्व राष्ट्रपति के निजी चिकित्सक रहे पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का रामपुर में हृदय गति रुकने से निधन हो गया।

बिलासपुर, अमृत विचार। देश के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य और पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के निजी चिकित्सक रहे वैद्य बालेंदु प्रकाश (67) का शुक्रवार की रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे। उनके निधन की खबर से देश-विदेश के आयुर्वेद चिकित्सा और शोध जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस प्रशासन ने अंतिम संस्कार से पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान कृषि राज्यमंत्री समेत क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिकों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

मूल रूप से बिलासपुर क्षेत्र से जुड़े और पिछले कुछ वर्षों से रुद्रपुर में रह रहे वैद्य बालेंदु प्रकाश ने आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनकी पुत्री वैद्य शिखा प्रकाश ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था और शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। साक्ष्य आधारित आयुर्वेद के जनक थे वैद्य बालेंदु प्रकाश को एविडेंस बेस्ड आयुर्वेद (साक्ष्य आधारित आयुर्वेद) का प्रमुख ध्वजवाहक माना जाता था। वे पारंपरिक रस शास्त्र (आयुर्वेदिक औषधियां और भस्म) के प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न रखकर वैज्ञानिक प्रमाणों और आधुनिक शोध से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया।

चिकित्सा क्षेत्र में उनके इसी अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1999 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। उन्होंने रुद्रपुर में पादाव स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर की स्थापना कर असाध्य रोगों पर शोध को नई दिशा दी। कैंसर और अग्न्याशय (पैंक्रियास) से जुड़े जटिल रोगों के आयुर्वेदिक उपचार पर उनके द्वारा तैयार की गई। चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों और विभिन्न विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। चिकित्सा जगत और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को आयुर्वेद की एक अपूरणीय क्षति बताया है। कहा कि आयुर्वेदिक भस्मों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने और इस विधा को वैश्विक स्तर पर नई विश्वसनीयता दिलाने में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक का काम करेगा। बताया कि बिलासपुर क्षेत्र के गांव सिकरौरा में रसशाला नाम से एक सेंटर चलाते हैं। शनिवार की दोपहर उनका गांव सिकरौरा में ही अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम संस्कार में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, पालिकाध्यक्ष चित्रक मित्तल, डॉ. वीके शर्मा समेत आदि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, सामाजिक लोग शामिल रहे। वहीं, पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दी।

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