जंगल, बादल, सुरम्य वादियां और पनचक्कियां
मध्य प्रदेश में पचमढ़ी अगर एकलौते हिल स्टेशन का रुतबा रखता है, तो सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसे बैतूल जिले में कुकरू प्रकृति की गोद में छिपे उस अनमोल रत्न जैसा है, जिसके बारे में दावा किया जा सकता है कि अगर आप प्रकृति और खुले वातावरण से प्यार करते हैं, तो इस एक बार इस हिल स्टेशन की सैर पर अवश्य आइए फिर पचमढ़ी को भूल जाएंगे। पचमढ़ी की अपेक्षा कुकरू में अभी पर्यटक अपेक्षाकृत कम ही जाते हैं। बैतूल जिला मुख्यालय से करीब 92 किमी की दूरी पर घने जंगलों के बीच सबसे ऊंची पहाड़ की चोटी पर स्थित बसा यह हिल स्टेशन प्रकृति प्रमियों के लिए किसी जन्नत सरीखा है। यहां पर्यटकों के लिए अनेकों ऐसे स्पॉट मौजूद है, जिन्हें कुदरत का खजाना कहा जाता है। ऐसी जगहों पर आप कैपिंग से लेकर नेचर ट्रेल, बर्ड वाचिंग, लैंड स्केप और फोटोग्राफी का मजा लेने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। कॉफी बागानों, पवन चक्कियों और जंगल कैंपिंग के लिए प्रसिद्ध यह हिल स्टेशन पर्यटकों को मन की शांति के साथ अनूठा सुकून प्रदान करता है।
गर्मियों में दिन रहता सुहावना और रात में ठंड का एहसास

शहरी हलचल से दूर, शांत और समृद्ध जैव विविधता से भरपूर बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू की उंचाई समुद्रतल से 1137 मीटर है। कोरकू जनजाति के निवास करने के कारण इस क्षेत्र को कुकरू नाम जाना जाता है। चारों ओर घने जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियों, हरियाली और झरनों के कारण यह स्थान साल भर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। मई-जून की गर्मियों में मैदानी इलाकों की अपेक्षा यहां का तापमान काफी कम दर्ज किया जाता है। दिन के समय अधिकतम तापमान जहां औसतन 34 से 37 सेल्सियस डिग्री रहता है, वहीं न्यूनतम पारा 22-23 डिग्री तक पहुंचने से रातें काफी सुहावनी और ठंडी होती हैं।
रास्ते में हेयरपिन मोड़, झरने और मानसून के समय सर्दियों जैसी धुंध
कुकरू में सुबह उगते और शाम को डूबते सूर्य का दृश्य बड़ा ही मनोरम होता है। चारों तरफ से घने जंगलों से आच्छादित यह प्राकृतिक स्थल कॉफी के बागवानों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां का वन क्षेत्र लंबी पैदल यात्रा और ट्रैकिंग के लिए आदर्श है। यहां पहुंचने के लिए सड़क घुमावदार है, जिसमें कई हेयरपिन मोड़ मिलते हैं। चारों ओर घने जंगलों के कारण यहां सर्दियों के मौसम की ही तरह मानसून के समय भी धुंध छाई रहती है। रास्ते में जगह-जगह छोटे-बड़े झरने मिलते हैं, बारिश के मौसम में इनसे गिरने वाला स्वच्छ पानी धुआं छोड़ता नजर आता है। यहां कुछ सनसेट पॉइंट के साथ इको पॉइंट भी हैं, जहां से हरे-भरे पहाड़ों का शानदार नजारा लिया जा सकता है। रास्ते में बिजली पैदा करने वाली पवन चक्कियां भी बड़ी संख्या में दिखाई देती हैं। कॉफी, तेलिया सागौन, मिश्रित वन और अदना नदी का निकटवर्ती क्षेत्र मिलकर यहां एक बेहद आकर्षक वातावरण सृजित करते हैं। बरसात के समय घुमड़ते घने बादलों के बीच धुंध और कोहरा कोकरू में दुर्लभ पर्वतीय अनुभव प्रदान करते हैं।
कोदो-कुटकी की खेती और हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र
कुकरू अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज, रबड़ी, मावा और स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं। आसपास के जंगलों में मिलने वाली वन उपज, जड़ी-बूटी और लकड़ी से बने हस्तशिल्प स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें पर्यटकों की भी दिलचस्पी रहती है।
एक बार पीकर देखिए दीवाना बना देंगे यहां के कॉफी बीन्स
कुकरू की अरेबिका और रोबस्टा कॉफी बीन्स के लोग बड़ी संख्या में दीवाने हैं। यहां की वादियां में घुली कॉफी की खुशबू दिलकश नजारे के साथ दार्जिलिंग या नीलगिरी जैसा सौंदर्य प्रस्तुत करती है। इसी कारण कुकरू को मध्य प्रदेश और मध्य भारत का एकलौता कॉफी उत्पादक क्षेत्र भी कहा जाता है। यहां कॉफी बागान की शुरुआत वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने की थी। सतपुड़ा के इस इलाके की जलवायु और मिट्टी कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल मिलने पर करीब 44 हेक्टेयर क्षेत्र में कॉफी की खेती शुरू हुई थी। इसके बाद यहां उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी बीन्स का उत्पादन होने लगा।
कैसे पहुंचे
वायु मार्ग – निकटतम एयरपोर्ट भोपाल और नागपुर
रेल मार्ग – निकटतम रेलवे स्टेशन बैतूल
सड़क मार्ग – बैतूल जिला मुख्यालय से 92 किमी
शुभम सिंह, मऊ
