Sambhal News : न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने उठाए सवाल, कहा- सच्चाई दबाने का प्रयास

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
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कहा पुलिस प्रशासन को बचाने के मकसद से तैयार की गई रिपोर्ट 

संभल हिंसा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे सच्चाई दबाने और पुलिस को बचाने की कोशिश बताया है।

संभल, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने संभल हिंसा मामले में न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे एकतरफा और तथ्यों से परे बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट वास्तविक सच्चाई सामने लाने के बजाय पुलिस-प्रशासन को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

शनिवार शाम अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि संभल प्रकरण को लेकर उन्होंने पहले भी संसद के दोनों सदनों में अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच की उम्मीद में एसआईटी का गठन किया गया था, लेकिन रिपोर्ट में वही पुरानी बातें दोहराई गई हैं, जो पहले से सामने आती रही हैं। उनका कहना था कि यदि जांच का निष्कर्ष पहले से ही तय था, तो एसआईटी गठित कर जनता के पैसे और समय की बर्बादी क्यों की गई। सांसद ने कहा कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। उनका आरोप था कि निष्पक्ष जांच के बजाय ऐसे निष्कर्ष दिए गए हैं, जिनसे पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवालों को दबाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती है और जनता का जांच प्रक्रिया पर भरोसा भी प्रभावित होता है। सांसद बर्क ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या सरकार का विरोध करना नहीं है, बल्कि छात्रों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय, उत्पीड़न और नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से उनका समाधान निकाला जाना चाहिए। सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि पूरे देश के छात्रों की वैध मांगों को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने बल प्रयोग के बजाय संवाद की नीति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की परेशानियों को समझकर उनका समाधान करना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में बातचीत ही हर समस्या का सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान है।

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