बरेली: लालफाटक ओवरब्रिज की एनओसी नहीं, अब रेलवे ने उलझाया पुल निर्माण
अमृत विचार, बरेली। छावनी की ओर से लालफाटक ओवरब्रिज के निर्माण में पेच फंसाने वाली रक्षा मंत्रालय की एनओसी की अड़चन भले ही दूर हो गई हो लेकिन अब रेलवे की लेटलतीफी ओवरब्रिज को उलझाएगी। ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा रेलवे को बनाना है, लेकिन रेलवे के अधिकारी कार्य कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। …
अमृत विचार, बरेली। छावनी की ओर से लालफाटक ओवरब्रिज के निर्माण में पेच फंसाने वाली रक्षा मंत्रालय की एनओसी की अड़चन भले ही दूर हो गई हो लेकिन अब रेलवे की लेटलतीफी ओवरब्रिज को उलझाएगी। ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा रेलवे को बनाना है, लेकिन रेलवे के अधिकारी कार्य कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
रेलवे अधिकारियों को तेज गति से कार्य कराने के लिए कई बार कहा जा चुका है। रेलवे की उदासीनता से प्रशासनिक अधिकारी उलझन में हैं। जिलाधिकारी नितीश कुमार का कहना है कि एनओसी मिलने के बाद छह-सात माह में सेतु निगम ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कर लेगा लेकिन रेलवे का कार्य ढिलाई से हो रहा है।
रेलवे लगातार अपना कार्य कराएगा, तब सालभर में पूरा कर पाएगा। यही गति रही तो डेढ़ साल में निर्माण कार्य पूरा नहीं होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि रक्षा मंत्रालय से मिलने वाली एनओसी की अड़चन दूर हो गई है। एनओसी मिलने पर सेतु निगम कैंट की ओर से ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कर देगा।
डीएम ने बताया कि रेलवे अधिकारियों के ढिलाई से काम कराने और निर्माण कार्य को तेजी से कराने के लिए डीआरएम मुरादाबाद और रेल मंत्रालय को पत्र लिखा गया है। लाल फाटक ओवरब्रिज का निर्माण करीब 84 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है।
तीन दिन पहले अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल बरेली दौरे पर आए, तब उन्होंने एनओसी जारी कराने के संबंध में रक्षा मंत्रालय में बात की। तब जनवरी के पहले सप्ताह में एनओसी जारी होने का आश्वासन मिला है।
बता दें कि लालफाटक पर जाम अधिक होने के चलते वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने ओवरब्रिज स्वीकृत किया था। ओवरब्रिज का एक हिस्सा कैंट और दूसरा हिस्सा बदायूं रोड को जोड़ता है। 980 मीटर लंबा ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है।
