हाईकोर्ट की दो टूक : तबादला मांगने वाले शिक्षक मनचाहे स्कूल की तैनाती नहीं पा सकते

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की मांग करने वाले प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक किसी खास विद्यालय में तैनाती के लिए विचार किए जाने का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि प्रदेश की नीति के तहत इस तरह के स्थानांतरणों पर जिलावार विचार करना होता है। 

प्रदेश सरकार की जून, 2026 की स्थानांतरण नीति को सही ठहराते हुए अदालत ने यह दलील खारिज कर दी कि स्थानांतरण की कवायद के लिए तैयार जिलेवार छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) से शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन हुआ है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने चार अध्यापकों द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दी जिसमें 22 जून, 2026 के सरकारी आदेश में उल्लिखित पीटीआर को चुनौती दी गई थी।

इन अध्यापकों की दलील थी कि पीटीआर की गणना स्कूल-वार और कक्षा-वार की जानी चाहिए। इन याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) (तैनाती) नियम, 2008 के तहत विशेष जिलों में प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के तौर पर की गई थी। ये नियम, निर्धारित परिस्थितियों में स्थानांतरण के अलावा स्थानांतरण पर रोक लगाते हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने चार जून, 2026 को एक नीति जारी की जिसमें निर्दिष्ट श्रेणियों में अंतर-जनपदीय स्थानांतरण की अनुमति दी गई। इन श्रेणियों में अलग-अलग जिलों में पति-पत्नी की तैनाती वाले मामले शामिल हैं। इस नीति के तहत जहां पति और पत्नी दोनों प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक हैं, कम पीटीआर वाले जिले के लिए स्थानांतरण के आवेदन पर विचार किया जा सकता है। 

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