Bareilly News : बरेली में अधिवक्ताओं के केबिन पर देर रात गरजा निगम का बुलडोजर

Amrit Vichar Network
Edited By Ateeq Khan
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सिविल लाइंस में सुधीर जैन पार्क के पास ऑफिसर्स कॉलोनी की दीवार के पास बने थे चैंबर

लखनऊ के बाद बरेली में वकीलों के अवैध चैंबर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नगर निगम में देर रात भारी पुलिस-बल की मौजूदगी में करीब दो दर्जन चैंबर ध्वस्त कर दिए। दिलचस्प बात ये है कि विरोध की आशंका के चलते पूरी कार्रवाई गोपनीय तरीके से और रात में अंजाम दी गई। वकीलों को जब तक भनक लगी, तब तक कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी थी।

अमृत विचार : बरेली के सिविल लाइंस स्थित सुधीर जैन पार्क के पास ऑफिसर्स कॉलोनी की दीवार घेरकर अवैध रूप से बनाए गए अधिवक्ताओं के चैंबरों पर गुरुवार रात करीब 10:30 बजे नगर निगम का बुलडोजर चला। दिन में चेतावनी दिए जाने के बावजूद अतिक्रमण न हटाने पर निगम ने यह कदम उठाया। विरोध की आशंका और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर रात में कार्रवाई की गई और मौके पर भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा।

 

Bareilly Police
बरेली में अधिवक्ताओं के चैंबर पर बुलडोजर कार्रवाई के दौरान तैनात पुलिस बल।

 

अफसरों के अनुसार, मुख्य मार्ग पर अवैध चैम्बर बनाये जाने के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो रही थी। आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी परेशानियां हो रही थीं। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य का कहना है की रोड किनारे कब्जा करने वालों को पहले ही नोटिस देकर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई थी।

विरोध की आशंका पर रात में एक्शन 

इसके बावजूद जब केबिन नहीं हटाए गए तो गुरुवार देर रात पुलिस बल के साथ पहुंची नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए अवैध घोषित करीब दो दर्जन चैंबरों को हटा दिया। कार्रवाई रात साढ़े दस बजे शुरू होकर करीब एक घंटे तक चली। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखते हुए सड़क पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। 

पता होने पर कुछ अधिवक्ता मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक कार्रवाई पूरी हो चुकी थी। मौके पर मौजूद कोतवाल राजीव कुमार ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिहाज से पर्याप्त पुलिस फोर्स नगर निगम की टीम के साथ तैनात रही। कार्रवाई के बाद पुलिस और नगर निगम की टीम लौट गईं।

बुलडोजर चलते ही जुटे वकील

अवैध बताए गए चेम्बरों पर जब गुरुवार देर रात नगर निगम का बुलडोजर चला, तो शुरुआती दौर में पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई। जैसे ही इसकी भनक वकीलों तक पहुंची तो कई अधिवक्ता वहां पहुंच गए। विरोध दर्ज कराने की कोशिश की भी गई, लेकिन उस समय तक देर हो चुकी थी। निगम की टीम कार्रवाई पूरी कर चुकी थी।

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