खुद में सदियों का इतिहास समेटे सूरजकुंड

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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बदायूं शहर से दातागंज मार्ग पर लगभग तीन किमी दूर गांव मझिया के पास स्थित 12 वीं सदी का ऐतिहासिक सूरजकुंड (सूर्यकुंड) है, जिसका संबंध राजा महीपाल के शासनकाल से है। उस समय सती प्रथा का प्रचलन था। पति की मौत के बाद महिलाएं यहां बने कुंड में स्नान के बाद सती होती थीं और उनकी मठिया बना दी जाती थी। बाहर शिलापट पर जानकारी लिखी जाती थी। सतियों की मठिया आज भी हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गईं हैं। उस क्षेत्र के अलावा पूरा सूरजकुंड पर्यटन स्थल बन चुका है। लोग सुकून पाने के लिए आते हैं। बताया जाता है कि सूरजकुंड के साक्ष्य लखनऊ के संग्रहालय में भी रखे हैं।


सूरजकुंड का इतिहास

साक्ष्यों के अनुसार 12वीं सदी में राजा महीपाल ने अपने शासनकाल में इस धार्मिक स्थल का निर्माण कराया था। जहां भगवान शिव के छोटे मंदिर बने और शिवलिंग भी थे, जिसके अवशेष आज भी मिलते हैं। एक बड़ा कुंड बनवाया, जिसमें उतरने के लिए 18 सीढ़ियां थीं। 9 ऊपर और 9 पानी के नीचे। कार्तिक महीने में मेला लगाया जाता था। यहां साल में दो बार बड़ा मेला लगता था, जिसमें देशभर से लोग पहुंचते थे। माघ पूर्णिमा पर भव्य यज्ञ होता था। वहीं राजा महीपाल के प्रधानमंत्री ने वेदों के अध्ययन के लिए यहां एक महाविद्यालय की स्थापना कराई थी। आज भी यहां गुरुकुल संचालित किया जाता है।

चीनी यात्री फाहियान के सन् 415 में तलाशने का दावा

सूरजकुंड को लेकर आज दो मत हैं। एक पक्ष का माना है कि राजा महीपाल के बनवाए गए इस स्थान पर शिव मंदिर था, वहीं दूसरे पक्ष का मानना है कि भगवान बौद्ध ने यहां वर्षावास किया था, जिसके चलते सूरजकुंड को सम्राट अशोक बुद्ध पर्यटन स्थल के नाम से भी जाना जाता है। दूसरे पक्ष के अनुसार इस स्थान को पहली बार चीनी यात्री फाहियान ने यात्रा के दौरान इस स्थान को खोजा था। इसी स्थान पर शाक्य मुनि भगवान बुद्ध ने वर्षावास किया था। पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर बौद्ध भिक्षुओं और उपासकों को धम्मदेशता दी थी। सम्राट अशोक के समय इसी स्थान पर बौद्ध बिहार बनवाए थे। राजा महीपाल ने भव्य सूरजकुंड बनवाया। चारों ओर चौरासी बौद्ध मठ भी बनवाए। 

साल 2016 में कराया गया था सूरजकुंड का सौंदर्यीकरण 

सूरजकुंड का इतिहास बहुत पुराना है। लगातार अनदेखी के चलते इसका अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था, जिसके चलते पूर्व में बदायूं और वर्तमान में आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने सूरजकुंड का सौंदर्यीकरण कराया था। 30 अप्रैल 2016 को शिलान्यास हुआ। कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने काम कराया था, जिसके बाद 99.06 लाख रुपये से जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने सौंदर्यीकरण के काम का शिलान्यास किया।  धार्मिक और पर्यटन स्थल सुरक्षित रखने के लिए सूरजकुंड के मंदिर से बुद्धि के खेत तक 15 लाख रुपये की लागत से 215 की चारदीवारी बनवाई गई।

सुकून पाने के लिए पहुंचते हैं लोग

सौंदर्यीकरण के बाद कुंड की स्थित दुरुस्त की गई थी। परिसर में जगह-जगह लाइटिंग की व्यवस्था की गई। हाईमास्ट लाइट भी लगाई गईं। टाइलीकरण किया गया था। कुंड को चारों ओर से पक्की सीढ़ियां लगाकर सही कराया गया था। बैठने के लिए हट बनाकर सीटें बनवाई गईं। लोगों के टहलने के लिए भी इंटरलॉकिंग कराई गई। फलवारी भी लगाई गईं, जिसके चलते आज सुकून पाने के लिए लोग इस पर्यटन स्थल पर पहुंचते हैं। सुबह से लेकर शाम तक लोगों की भीड़ रहती है। कुंड में भरा पानी और उसकी मछलियां मन को सुकून देते हैं। कहा जाता है कि उसमें मौजूद मछलियां को दाना खिलाने से पुण्य मिलता है। किनारे पर कुछ डालने से मछलियां पास में चली आती हैं।

-ऋषिदेव गंगवार, बदायूं

 

 

 

 

 

 

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