भारत-चीन मिलकर सुलझाएंगे सीमा विवाद, अजित डोभाल और वांग यी की बड़ी मीटिंग; जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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बीजिंग। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों में सुधार को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की। यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत की संभावित यात्रा को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर मतभेद प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता के लिए निर्धारित विशेष प्रतिनिधि हैं। यह व्यवस्था वर्ष 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद के व्यापक समाधान के लिए स्थापित की गई थी। 

चीन के उपराष्ट्रपति हान से मिले डोभाल

वार्ता से पहले सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच हुई बातचीत में सीमा क्षेत्रों में शांति व स्थिरता मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। 

डोभाल की चीन के उपराष्ट्रपति के साथ यह मुलाकात दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25 वें दौर की वार्ता से पहले हुई। दूतावास ने बताया कि  डोभाल और उपराष्ट्रपति हान ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप, सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता को मजबूत करने तथा आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। डोभाल चीन के विदेश मंत्री और सीमा मामलों चर्चा के लिए पर चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ वार्ता के लिए चीन की यात्रा पर हैं।

गलवान घाटी विवाद के बाद से तनाव पूर्ण माहौल  

साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दिल्ली और बीजिंग के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों ने संबंधों को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं। विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता की इस व्यवस्था से सीमा विवाद को हल करने में सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी इसे विभिन्न मुद्दों पर बार-बार उभरने वाले तनाव से निपटने के लिए एक उपयोगी माध्यम मानते हैं। 

भारत आने के सवाल को किया था दरकिनार 

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की घोषणा की। लेकिन जब उनसे शी चिनफिंग की भारत यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। शी की भारत यात्रा के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात का अवसर मिल सकता है। इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़ी पहलों पर चर्चा कर सकते हैं। 

SCO 2025 में मिले थे शी और मोदी 

मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी। विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के बारे में लिन ने कहा कि डोभाल और वांग सीमा विवाद के साथ-साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी गहन चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता सीमा विवाद पर चीन और भारत के बीच बातचीत का "मुख्य माध्यम" है। 

साथ ही, यह दोनों देशों के बीच साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। लिन ने कहा कि पिछले साल अगस्त में चीन और भारत के बीच 24वें दौर की वार्ता हुई थी जिसमें दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर स्पष्ट और गहन विचार-विमर्श किया था। उन्होंने कहा कि इस दौर की वार्ता में भी दोनों पक्ष सीमा विवाद पर गहन संवाद जारी रखेंगे और दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी साझा समझ की भावना के अनुरूप सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने पर की चर्चा 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी


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