Asian Games 2026: मीराबाई चानू की नजर पहली एशियाई पदक पर, बोलीं- जापान में मिलेगी ओलंपिक जैसी चुनौती

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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राष्ट्रमंडल खेलों में तीसरी बार गोल्ड जीतने के बाद मीराबाई चानू ने एशियाई खेलों के लिए बढ़ाया फोकस, चीन-उत्तर कोरिया और थाईलैंड की दिग्गज खिलाड़ियों से होगा मुकाबला।

नई दिल्लीः भारत की स्टार भारोत्तोलक और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 32 वर्षीय मीराबाई ने विश्व स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें टोक्यो ओलंपिक 2021 का रजत पदक भी शामिल है। हालांकि, एशियाई खेलों में अब तक वह पदक जीतने में कामयाब नहीं हुई हैं। इस बार उनका लक्ष्य इस कमी को पूरा करना है। मीराबाई ने हाल में ही राष्ट्रमंडल खेलों में तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता था।

चीन और उत्तर कोरिया की खिलाड़ियों से मिलेगी कड़ी चुनौती

मीराबाई के मुताबिक एशियाई खेल राष्ट्रमंडल खेलों से बिल्कुल अलग और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होंगे उनके भार वर्ग में एशिया की ही कई मजबूत खिलाड़ी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जापान में होने वाली प्रतियोगिता में ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

मीराबाई ने 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों से पहले साइ (भारतीय खेल प्राधिकरण) मीडिया से कहा, ''राष्ट्रमंडल खेलों में मेरे लिए प्रतिस्पर्धा कठिन नहीं थी। ग्लास्गो में मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा तो अब होनी है।'' उन्होंने कहा, ''मैं यह देखना चाहती हूं कि जापान में मैं कितने आगे तक बढ़ सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे कठिन रहे हैं। इस बार एशियाई खेलों में आपको शायद ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिले क्योंकि मेरे भार वर्ग में सबसे मजबूत भारोत्तोलक एशिया से हैं।''

एशियाई खेलों में अब तक नहीं जीत पाईं पदक

 

मीराबाई का एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में रहा, जहां उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में चौथा स्थान हासिल किया था। इससे पहले चोट के कारण वह 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकी थीं।

ऐसे में इस बार उनकी नजर अपने एशियाई खेलों के पहले पदक पर है।

कोच की निगरानी में कड़ी तैयारी

मीराबाई जानती हैं कि एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीतने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। इसके लिए वह किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती हैं। यही वजह है कि वह कोच विजय शर्मा और अमेरिका के 'स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग' कोच डॉ. आरोन हॉर्शिंग द्वारा निर्धारित दिनचर्या का पालन कर रही हैं। उन्होंने कहा, ''हम प्रत्येक बृहस्पतिवार को उनके साथ वीडियो कॉल करते हैं और प्रशिक्षण, रिकवरी और भविष्य के कार्यक्रम को लेकर चर्चा करते हैं। हर चीज की बारीकी से समीक्षा की जाती है। डॉ. हॉर्शिंग खुद एक भारोत्तोलक रह चुके हैं, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी की जानकारी है। इससे मैं फिटनेस बनाए रखने में सफल रही हूं।''

गोल्ड जीतने के बाद भी नहीं लिया ब्रेक

मीराबाई एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए इतनी बेताब है कि उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद विश्राम नहीं किया और सीधे मोदीनगर स्थित अपने अभ्यास केंद्र के लिए रवाना हो गईं। उन्होंने कहा, ''मैं अभ्यास करने के लिए सीधे मोदीनगर वापस आ गई। दरअसल, मैं घर (मणिपुर) नहीं गई और मैं एशियाई खेलों में पदक जीतने के बाद ही घर जाऊंगी।''

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