Bareilly News : दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने परचमे रिसालत सौंपकर रवाना किया जुलूस-ए-मुहम्मदी
पैगंबर-ए-इस्लाम ने हर किस्म का भेदभाव खत्म करके सभी को बराबरी का दर्जा दिया
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अपनी तकरीर में कहा कि हमारे नबी ने अगड़े-पिछड़ों, ऊंच-नीच, काले और गोरे का भेदभाव को खत्म करके सबको बराबरी का दर्जा दिया। जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। दुनियावालों को अमन-शांति का पैगाम दिया। हम सबको उसी पैगाम पर अमल करके जिंदगी बस करनी है।
अमृत विचार : पैगंबर-ए-इस्लाम की 1501 वीं यौमे पैदाईश का जश्न (जश्ने ईद-मिलादुन्नबी) पूरी शानो शौकत के साथ मनाया जा रहा है। अंजुमन खुद्दामें रसूल के तत्वाधान में दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) की कयादत में जुलूस-ए-मुहम्मदी निकला। जुलूस की रवानगी से पहले दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां के घर और कोहाड़पीर जुलूस मंच पर उलेमा ने नबी-ए-करीम की शिक्षा और जिंदगी रोशनी डाली।
दरगाह के बुजुर्गों ने सुबुर रजा को परचम-ए-रिसालत सौंपकर जुलूस रवाना किया। अपने पुराने रास्तों कोहाड़ापीर से कुतुबखाना, जिला अस्पताल, कुमार सिनेमा, कोतवाली के रास्ते दरगाह हजरत पहलवान मियां पहुंचा। यहां सलामी देने के बाद नावेल्टी चौराहा होकर राजकीय इंटर कॉलेज, खलील तिराहा, करोलान, बिहारीपुर ढाल होकर दरगाह आला हजरत पर समाप्त हुआ।
गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा
जुलूस के दरम्यान गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा भी देखने को मिला। सभी समुदाय के लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। फूल बरसाए। रंग-बिरंगी पोशाक पगड़ी और जुब्बा पहने अकीदतमंद अंजुमनों के साथ आगे बढ़ते रहे। सरकार की आमद मरहबा-दिलदार की आमद मरहबा...के नारे गूंजते रहे। सबसे आगे परतापुर जीवन सहाय की अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा और रेलवे जंक्शन की अंजुमन अनवारे मुस्तफा चली।
नबी ने हर किस्म का भेदभाव मिटाया
जुलूस से पहले मुफ्ती जईम रजा ने कुरान की तिलावत की। नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अपनी तकरीर में कहा कि हमारे नबी ने अगड़े-पिछड़ों, ऊंच-नीच, काले और गोरे का भेदभाव को खत्म करके सबको बराबरी का दर्जा दिया। जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। दुनियावालों को अमन-शांति का पैगाम दिया। हम सबको उसी पैगाम पर अमल करके जिंदगी बस करनी है।
अंजुमनों के सदर की दस्तारबंदी
मुफ्ती अय्यूब खान नूरी, मुफ्ती जमील ने भी खिताब किया। खुसूसी दुआ मुफ्ती आकिल रज़वी ने की। मौलाना सुब्हानी मियां और मुफ्ती अहसन मियां, सय्यद आसिफ मियां और सभी अंजुमनों के सदर का स्टेज पर स्वागत किया गया। अंजुमन खुद्दामें रसूल के सचिव शान अहमद रज़ा ने दस्तारबंदी की। सदर सय्यद आसिफ मियां ने जुलूस की व्यवस्था संभालने वालों की दस्तारबंदी कर स्मृति चिन्ह दिया।
दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि जुलूस में मुख्य रूप से अंजुमन अनवारे मुस्तफ़ा,अंजुमन ग़ौसुल वरा,अंजुमन आशिकाने रज़ा, अंजुमन जानिसारने रसूल,अंजुम कुर्बान-ए-रसूल,अंजुमन रज़ा-ए-मिल्लत,अंजुमन फैज़ुल कुरान शामिल रही।
इन्होंने संभाली व्यवस्थाएं
जुलूस की व्यवस्था राशिद अली खान, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, शाहिद नूरी, परवेज नूरी, औररंगजेब नूरी, शारिक बरकाती, तारिक सईद, आलेनबी, नईम नूरी, इशरत नूरी, आसिम रज़ा, हाजी राशिद हुसैन, सय्यद माजिद, मंज़ूर रज़ा, मुजाहिद रज़ा,युनुस गद्दी,मोहसिन रज़ा,काशिफ सुब्हानी,मुस्तकीम नूरी,इरशाद रज़ा,साजिद नूरी,सय्यद एजाज़,फारूक खान,नईम नूरी,अशमीर रज़ा,युनुस साबरी,मोहम्मद आसिफ,सुहैल रज़ा,गौहर खान आदि ने संभाली। सुकून के साथ जुलूस संपन्न होने पर कमेटी ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
