हरदोई DM और कई-BSA पर संसद की याचिका समिति में शिकायत, स्कूलों की बदहाली और सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच की मांग

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आप सांसद संजय सिंह ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षा योजनाओं में कम खर्च और पीएम-पोषण योजना के आंकड़ों को लेकर राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष शिकायत की है। उन्होंने यूपी में 2019-20 से 2021-22 के दौरान करीब 9,103 करोड़ रुपये खर्च न होने का दावा करते हुए शिक्षा बजट के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।

लखनऊ, अमृत विचारः आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सरकारी विद्यालयों की स्थिति को बदहाल बताते हुए शिक्षा योजनाओं में आवंटित धनराशि के कम उपयोग, बुनियादी सुविधाओं की कमी और मिड-डे मील/पीएम-पोषण में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष की है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा के नाम पर हजारों करोड़ रुपये के बजट का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ योजनाओं की धनराशि पूरी तरह खर्च नहीं हो रही है। शिकायत में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की पांच केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 62,660 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले 13 फरवरी 2026 तक केवल 32,296.54 करोड़ खर्च हुए, यानी बजट अनुमान का लगभग 51.5 प्रतिशत।

वहीं समग्र शिक्षा के 41,250 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले उपयोग केवल 54.9 प्रतिशत रहा। संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2019-20 से 2021-22 के दौरान लगभग 9,103 करोड़ की धनराशि खर्च नहीं की गई, जबकि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। यह गंभीर सवाल है कि जब स्कूलों को सुधारने के लिए पैसा उपलब्ध था तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया।

संजय सिंह ने पीएम-पोषण योजना को लेकर कहा कि वर्ष 2025-26 में ₹12,500 करोड़ के आवंटन के मुकाबले 13 फरवरी 2026 तक केवल ₹6,639.22 करोड़ खर्च हुए, जबकि बाद में संशोधित अनुमान घटाकर ₹10,600 करोड़ कर दिया गया। साथ ही लाभार्थी बच्चों की संख्या भी 2022-23 में 12.16 करोड़ से घटकर 2024-25 में 10.99 करोड़ रह गई।

बकौल संजय सिंह 

1,210 विद्यालयों में कार्यशील पेयजल सुविधा नहीं है।
770 विद्यालयों में पेयजल सुविधा ही नहीं है।
8,738 विद्यालयों में हाथ धोने की सुविधा नहीं है।
6,460 विद्यालयों में बालिका शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
5,054 विद्यालयों में बालक शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
3,600 विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था कार्यशील नहीं है।
26,151 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन नहीं है।
63,590 विद्यालयों में खेल का मैदान नहीं है।
91,324 विद्यालयों में पिछले शैक्षणिक वर्ष में विद्यार्थियों का चिकित्सा परीक्षण नहीं कराया गया।
1,31,609 विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा नहीं है।
2,59,414 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है।
47,897 विद्यालयों में लाइब्रेरी/बुक बैंक/रीडिंग कॉर्नर नहीं है।
1,01,407 विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम के लिए कार्यशील कंप्यूटर नहीं हैं।
76,743 विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए रैंप नहीं है।

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