Moradabad News : रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया नहीं, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और सही तरीका
प्रेम, विश्वास, कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों का महान पर्व है रक्षाबंधन
मुरादाबाद में इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त को उदयातिथि के अनुसार मनाया जाएगा। भद्रा का साया न होने से बहनें दिनभर राखी बांध सकेंगी।
मुरादाबाद, अमृत विचार। भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों का महान पर्व है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार सदियों से समाज में आत्मीय संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता आया है। बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित केदार मुरारी ने बताया कि रक्षाबंधन का उल्लेख पौराणिक प्रसंगों में मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रेमपूर्ण संबंध से लेकर माता लक्ष्मी द्वारा राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधने की कथा यह बताती है कि रक्षाबंधन केवल रक्त संबंधों तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्नेह, श्रद्धा और विश्वास से बने हर पवित्र रिश्ते में रक्षाबंधन का भाव विद्यमान रहता है।
दिन में कभी भी बांधा जा सकेगा रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त शुक्रवार को मनेगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से प्रारम्भ होकर 28 अगस्त की प्रात: 9:48 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही मान्य रहेगा। पंडित केदार मुरारी ने बताया कि इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा और बहनें दिन भर में कभी भी रक्षा बांध सकेंगी। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें। भाई को स्वच्छ एवं श्रद्धापूर्वक आसन पर बैठाकर उसके मस्तक पर तिलक करें, अक्षत लगाएं, आरती उतारें और दाहिने हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उसकी मंगलकामना करें। मिठाई खिलाकर भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति प्रेम एवं सम्मान का भाव रखें।
भाई बहन के अटूट प्रेम, विश्वास, रक्षा व कर्तव्य पालन का पर्व है रक्षाबंधन : अर्द्धमौनी
महानगर सन्त एवं प्रान्त प्रमुख भारतीय संस्कृति रक्षा अभियान वैष्णवाचार्य धीरशान्त ‘अर्द्धमौनी’ ने कहा कि रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम, विश्वास, रक्षा व कर्तव्य पालन का पर्व है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रथम रक्षासूत्र माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर बांधा था। भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने के बाद माता लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई बनाकर रक्षासूत्र बांधा और भगवान विष्णु को राजा बलि से पुनः प्राप्त किया। रक्षा बंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा, कर्तव्य, स्नेह और पारिवारिक एकता का पवित्र प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें संकल्प देता है कि हम सदैव अपनी मातृ शक्ति की रक्षा, सम्मान और सहयोग तथा समाज में प्रेम और सद्भाव का संकल्प लें।
ऐसे बांधे राखी या रक्षासूत्र
: पूजा की थाली तैयार करें, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें।
: भाई को रोली और अक्षत से तिलक लगाएं।
: दाहिनी हाथ की कलाई पर राखी बांधकर भाई को मिठाई खिलाकर उसके सुख की कामना करें।
: भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लें।
: यह केवल रस्म नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम और कर्त्तव्य का बंधन है।
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