Bareilly News : बरेली में फर्जी आईएएस अधिकारी विप्रा के खिलाफ ठगी के तीन और केस दर्ज, पुलिस के पास पहुंच चुकीं करीब 35 शिकायतें

Amrit Vichar Network
Edited By Ateeq Khan
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फर्जी अधिकारी बताकर ठगी करने वाली सिस्टर्स के खिलाफ गैंगस्टर कार्रवाई की तैयारी 

विप्रा सक्सेना ने खुद को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर ठगी का धंधा शुरू किया। उसके झांसे में आकर कई लोग शिकार बने। लाखों रुपये गंवाने के बाद अब पुलिस में शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। बारादरी पुलिस के मुताबिक व्रिपा के खिलाफ करीब 35 शिकायतें सामने आ चुकी हैं और ये सिलसिला लगातार जारी है।

अमृत विचार : बरेली में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की फर्जी अधिकारी बताकर ठगी करने वाली विप्रा शर्मा गैंग के खिलाफ पुलिस ने तीन और केस दर्ज किए हैं। बारादरी थाने में आई शिकायतों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाईकी है। ग्रीन पार्क निवासी विप्रा पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप है। 

विशारतगंज निवासी मंजूर अहमद ने अपनी शिकायत में कहा कि 24 जुलाई 2025 को वह कोतवाली क्षेत्र के एक होटल में थे। यहां गाड़ी रुकी। उस पर यूपी सरकार लिखा था। गाड़ी में सवार विप्रा शर्मा के साथ दो-तीन गार्ड थे। उन्होंने खुद को आईएएस अधिकारी बताया और कहा कि वह एडीएम के पद पर तैनात हैं।

15 लाख ठग लिए 


उन्होंने सचिवालय में अधिकारियों से संबंध का हवाला देते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। इसके एवज में 15 लाख रुपये मांगे। मंजूर का दावा है कि उन्होंने रुपये दे दिए। इसके बाद युवती ने उसे फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया।

कृषि विभाग के फर्जी नियुक्ति पत्र 

दूसरे मामले में विप्रा शर्मा ने नवादा के स्वतंत्रता सेनानी कॉलोनी निवासी विनोद कुमार और उनके बेटे विशाल की सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 12 लाख रुपये ले लिए। रुपये लेने के बाद विप्रा शर्मा ने कृषि विभाग में अधिकारी और चालक की नौकरी लगने के ज्वाइनिंग लेटर भेजे। ये लेटर ही फर्जी थे। 

गुरुकुल में ढूंढे शिकार 

तीसरी ठगी संभल निवासी मयंक शर्मा के साथ की गई। मयंक ने बताया कि विप्रा शर्मा गुरुकुल में आती-जाती थी और उसने खुद के एसडीएम होने की बात कही थी। 22 अक्तूबर 2025 को विप्रा और उसकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक ने मयंक के भाइयों शिव ओम और राघव की पुलिस में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर करीब 20 लाख रुपये खर्च की बात कही। 

मयंक ने विप्रा के खाते में 3.50 लाख रुपये, फिर 50 हजार रुपये ऑनलाइन और करीब 2.50 लाख रुपये नकद दिए। कुल करीब 6.50 लाख रुपये देने के बाद भी चयन नहीं हुआ। बाद में पता चला कि विप्रा और दीक्षा नौकरी के नाम पर ठगी के मामले में जेल में हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

करीब 35 मुकदमें दर्ज

बारादरी थाने के इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह के मुताबिक, विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के खिलाफ लगातार ठगी की शिकायतें मिल रही हैं। पुलिस 35 के लगभग मुकदमें उन पर दर्ज कर चुकी है। आरोपी बहनों के खिलाफ जल्द ही चार्जशीट लगाकर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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