Lucknow Double Murder: ढाई किमी की दूरी और 30 मिनट में उजड़ गया पूरा परिवार, दिव्या मिश्रा हत्याकांड में कोर्ट की तारीख से जुड़ा एंगल
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पत्नी की हत्या के बाद घर पहुंचा मानस, मानसिक रूप से बीमार बहन को भी मारी गोली और फिर खुदकुशी की; पुलिस सीसीटीवी फुटेज और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी
लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी के पॉश व भीड़भाड़ वाले इलाके गोमतीनगर में गुरुवार को दो हत्या व एक खुदकुशी ने पूरी राजधानी को हिला दिया। पहली हत्या व दूसरी हत्या और खुदकुशी के बीच की दूरी कुल ढाई किलोमीटर की थी। करीब 30 मिनट में पूरी वारदात हो गई। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाती हुई मिठाईवाला से हुसड़िया चौराहे के बीच दौड़ने लगी। अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जांच में सामने आया कि दो दिन पहले 18 अगस्त को फैमिली कोर्ट में तारीख के बाद से ही इस घटना की रूपरेखा तैयार हो गई थी। पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है।
पुलिस की शुरूआती जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 में मानस के पिता राबिन बाजपेई की मौत हो गई। इसके बाद मानस के कंधों पर मां और बहन की जिम्मेदारी आ गई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आलमबाग की रहने वाली दिव्या से हुई। दोनों के बीच प्रेम हुआ। वर्ष 2017 में दोनों ने शादी कर लिया। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। एक वर्ष बाद दिव्या घर छोड़कर चली गई। वर्ष 2018 में मानस की मां को कैंसर होने की जानकारी मिली तो वह फिर साथ रहने लगी। कुछ दिनों तक सब ठीक चला। एक वर्ष बाद 2019 में मानस के मां की भी मौत हो गई। इसके बाद से विवाद और बढ़ गया।
मानसिक बीमार बहन के साथ रहने लेकर होता था विवाद
पुलिस की जांच में सामने आया कि मानस की बहन तुलिका उर्फ सीबा मानसिक रुप से बीमार थी। दिव्या उसके साथ नहीं रहना चाहती थी। इसी को लेकर अक्सर विवाद होता था। मां की मौत के बाद मानस अकेला पड़ गया। बातचीत कर दिव्या को साथ रहने के लिए राजी किया। पर, दोनों के रिश्ते ज्यादा दिन नहीं चल सके। जनवरी 2026 में दिव्या ने फैमिली कोर्ट में तीन मुकदमा दायर कर दिया। इसमें स्त्रीधन वापसी, भरण-पोषण और तलाक से जुड़े मामले शामिल थे। मार्च में मानस ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार फिर साथ रहने के लिए अदालत में गुहार लगाई, लेकिन दिव्या इसके लिए तैयार नहीं हुई। मामले की सुनवाई चल रही थी।
दिव्या ने मांगा था एक करोड़ का गुजारा-भत्ता
डीसीपी पूर्वी डा. दीक्षा शर्मा ने बताया कि 18 अगस्त को भी अदालत में तारीख थी। मानस अपने परिचितों से दिव्या की ओर से मांगे जा रहे एक करोड़ रुपये के गुजारा-भत्ता का जिक्र करता था। उसके एक साथी ने पुलिस को बताया कि वह करीब तीन महीने से आडिट के सिलसिले में शहर से बाहर था। लौटने पर उसे कोर्ट की तारीख के बारे में पता चला। उसने बताया कि मानस घटना से एक दिन पहले से ही अवसाद में था। साथी का कहना था कि उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि मानस इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
रक्षाबंधन के आठ दिन पहले ही भाई-बहन की मौत
भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन आठ दिन बाद 28 अगस्त को है। मानस ने पूरे घटना की रुपरेखा पहले से तैयार कर ली थी। उसने पहले दिव्या की हत्या की। इसके बाद घर पहुंचा। अपनी मानसिक बीमार बहन तुलिका की हत्या की। फिर खुद को गोली मार ली। उसके पता था अगर दिव्या की हत्या के बाद वह खुद को मार लेता है या पुलिस पकड़ लेती है तो उसकी मानसिक बीमार बहन की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। इसी कारण उसने रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन पहले पत्नी की हत्या कर घर पहुंचा। उसने घर पर टीवी पर भजन चलाया। इसके बाद बहन को मौत के घाट उतारा और खुद को गोली मार ली। पुलिस की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है। पुलिस के मुताबिक बहन की हत्या के पीछे मानस की यह सोच सामने आई कि उसके बाद उसकी देखभाल कौन करेगा। यह सोच अपने पीछे ऐसा सवाल छोड़ गई, जिसने पूरे परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
प्रज्ञा मिश्रा ने अपने पोस्ट में लिखा- कॉश हम पूर्णागिरी चले गए होते…
मेरी बहन दिव्या मिश्रा लखनऊ के गोमतीनगर आईसीआईसीआई बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर थी वो पति की साइको हरकतों और उसकी बहन के पागलपन की बीमारी की वजह से अलग रह रही थी.. रोज की तरह वो सुबह नौ बजे दफ़्तर पहुंची थी..दफ़्तर पहुंचने के बाद उसने अपना कामकाज निपटाया उसके बाद वो किसी से कुछ चेक कलेक्ट करने के लिए अपने कलीग के साथ बाहर चली गई..इस दरम्यान उसका साइको पति दो रिवॉल्वर के साथ ऑटो से रेकी करने लगा. .जब वो बैंक पहुंची बैंक के गेट पर उसके पति ने पहले पहली रिवॉल्वर से गोली चलाई..फिर रिवॉल्वर की बट से चेहरे सिर पर कई वार किए..पास के सब लोग जान बचाकर भाग गए..फिर दूसरा रिवॉल्वर निकाला उससे फायर किया..माथे पर उसके बहुत बड़े बड़े होल हैं..दिव्या मेरी बहन तुम अब नहीं हो ये यकीन कर पाना बहुत मुश्किल है..तुम मम्मी का बेटा थी..मम्मी का बार बार फोन आ रहा है..मेरी हिम्मत नहीं है की की मैं उनको कह सकूं की तुम अब नहीं रहीं..दिव्या काश की तुम इतनी सीधी नहीं होतीं..काश हम आज पूर्णागिरि घूमने चले गए होते..।
