ठिठुरा गया साल का आखिरी दिन, नए साल का पहला दिन भिगोने को तैयार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साल के आखिरी दिन हाड़ कंपा देने वाली गलन और शीतलहर के बीच सड़कों और बाजारों पर आमतौर पर वीरानी का आलम रहा। वहीं, नये साल के पहले दिन से ही छिटपुट बारिश की संभावना के बीच ठंड के तेवर में इजाफा होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार एक …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साल के आखिरी दिन हाड़ कंपा देने वाली गलन और शीतलहर के बीच सड़कों और बाजारों पर आमतौर पर वीरानी का आलम रहा। वहीं, नये साल के पहले दिन से ही छिटपुट बारिश की संभावना के बीच ठंड के तेवर में इजाफा होने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार एक जनवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ एक इलाकों में रिमझिम बारिश का अनुमान है। जबकि दो से चार के बीच राज्य के अधिसंख्य इलाकों में बूंदाबांदी होने के आसार हैं। इस दौरान कोहरा और घना होने से दृश्यता के स्तर में गिरावट आने और सर्द हवाओं से तापमान में भी गिरावट का अनुमान है।
इस बीच गुरूवार को अधिसंख्य स्थानों पर साल के आखिरी दिन की शुरूआत धुंध,कोहरा और गलन भरी ठंड के साथ हुई। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, फतेहपुर और प्रयागराज समेत कई इलाकों में सुबह दस बजे तक सूर्य के दर्शन नहीं हुए। तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दिया, नतीजन सड़कों पर भीड़भाड़ कम रही वहीं बाजार भी देर से खुले।
नये साल के जश्न की तैयारी कर रहे खासकर युवाओं ने कोरोना का हवाला देते हुये घर पर ही पार्टी करने का बहाना दोस्त यारों से किया। उधर, कोविड के नये स्ट्रेन के मद्देनजर जिला प्रशासन की खास नजर नये साल के जश्न पर रही। मौसम विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य के अधिकतर इलाकों में अधिकतम तापमान 14 से 19 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकार्ड किया गया।
वहीं न्यूनतम तापमान तीन से नौ डिग्री के बीच रहा। लखनऊ में शाम पांच बजे तापमान 15 डिग्री सेल्सियस था। वहीं कानपुर में 16 डिग्री,आगरा में 14 डिग्री और मुजफ्फरनगर में 15 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। पिछले 24 घंटे में नजीबाबाद राज्य का सबसे ठंडा इलाका रहा।
जहां न्यूनतम तापमान महज तीन डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इस दौरान गोरखपुर में अधिकतम तापमान सबसे ज्यादा यानी 23 डिग्री सेल्सियस रहा। राज्य के अधिकतर क्षेत्रों में मौसम आमतौर पर शुष्क रहा। इक्का दुक्का स्थानों पर बहुत घना कोहरा छाये रहने से सड़कों पर यातायात रेंग रेंग कर चला।
