अयोध्या: विश्व हिन्दू महासंघ ने अंग्रेजी नव वर्ष का किया बहिष्कार
अयोध्या। विश्व हिंदू महासंघ के बैनर तले गुरूवार को दशरथगद्दी रामकोट में एक बैठक आयोजित हुई। जिसमें संतों ने अंग्रेजी नववर्ष के पूर्ण बहिष्कार का फैसला लिया। साथ ही लोगों से भी बहिष्कार करने का आह्वान किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए दशरथगद्दी के महंत बृजमोहन दास ने कहाकि हम अंग्रेजो की नकल न करें। …
अयोध्या। विश्व हिंदू महासंघ के बैनर तले गुरूवार को दशरथगद्दी रामकोट में एक बैठक आयोजित हुई। जिसमें संतों ने अंग्रेजी नववर्ष के पूर्ण बहिष्कार का फैसला लिया। साथ ही लोगों से भी बहिष्कार करने का आह्वान किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए दशरथगद्दी के महंत बृजमोहन दास ने कहाकि हम अंग्रेजो की नकल न करें। हमें अंग्रेजी नव वर्ष नही मनाना चाहिए। बल्कि इसका पूर्ण बहिष्कार करें। तभी हमारी भारतीय संस्कृति बचेगी। सम्पूर्ण भारतवासी हिंदी नव वर्ष मनाए। जो प्रतिवर्ष चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज हम साधु-संत हिंदी नववर्ष का बहिष्कार कर रहे हैं, जिसका आगाज अयोध्या से हो चुका है। सभी लोग अंग्रेजी नववर्ष का बहिष्कार करें। इसी उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई है। ख्याति लब्ध कथाव्यास देवेंद्र पाठक ने कहा कि हम सब आर्यावर्त के वासी हैं। अपनी परम्परा का मिलकर मान बढ़ायें। चैत्र मास में हिंदी नव वर्ष को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएं। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी इससे प्रेरणा मिल सके।
वहीं विश्व हिंदू महासंघ की महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष दीपिका सिंह ने कहाकि संतों के कारण हमारी भारतीय संस्कृति बची हुई है। सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा संत ही कर रहे हैं। इसलिए हम सबको संतों की शरण में आना चाहिए। गुरू के बिना प्रभु श्रीराम भी नही चले। उन्हें भी गुरू के शरण की आवश्यकता पड़ी। हम लोग ऐसा कार्य करें, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी को हम पर गर्व हो। सभी से आहवान है कि ज्यादा से ज्यादा अंग्रेजी नववर्ष का बहिष्कार करें और हिंदी नववर्ष मनाएं।
अंत में महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष ने माल्यार्पण व अंगवस्त्र ओढ़ाकर संतों को सम्मानित भी किया। इस मौके पर शत्रुघ्न निवास के महंत पवनकुमार शास्त्री, करपात्री महाराज, महंत बलराम दास हनुमानगढ़ी, महंत सत्येंद्र दास वेदांती, महंत डॉ. उद्धव शरण, महंत हनुमान दास, महंत रामनरेश शरण, महंत पवनकुमार दास, महंत कृष्ण कुमार दास, महंत सीताराम दास, रामदास दयालु, संत नारद मुनि, पुजारी राजकुमार दास, हिंदू नेता संतोष दूबे, नारायण मिश्र, वरूण दास, पहलवान मनीराम व राजेश दास, अनिरूद्ध दास, वीरू दास, अनिल दास, सौरभ दास, रामदत्त दास, सियाराम दास आदि मौजूद रहे।
