यूपी में स्वाइन फ्लू पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी अस्पतालों में H1N1 जांच अब पूरी तरह मुफ्त
2 सितंबर तक प्रदेश में H1N1 के 685 लैब-पुष्ट मामले सामने आए; सीएम योगी ने घर-घर निगरानी, अलग हेल्प डेस्क और गंभीर मरीजों के लिए ICU की व्यवस्था के दिए निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू और मौसमी बुखार के बढ़ते मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और मेडिकल कॉलेजों में H1N1 की जांच पूरी तरह निशुल्क करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली पर भी सख्ती बरतने को कहा गया है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि 2 सितंबर तक प्रदेश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए H1N1 के 685 मामले सामने आ चुके हैं।
छींक-खांसी से फैलता है संक्रमण, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और आंखों में लालिमा शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संक्रमण की निगरानी केवल अस्पतालों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सक्रियता बढ़ाई जाए।
आशा-एएनएम घर-घर करेंगी संदिग्ध मरीजों की पहचान
सीएम योगी ने आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
अस्पतालों में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए अलग काउंटर और हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे। गंभीर मरीजों के लिए विशेष ICU वार्ड की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
हल्के लक्षण वालों को होम आइसोलेशन की सलाह
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों में सामान्य या हल्के लक्षण हैं, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होम आइसोलेशन में रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम करना और गंभीर मरीजों के लिए तत्काल उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है।
RT-PCR किट और ओसेल्टामिविर की पर्याप्त उपलब्धता
बैठक में SGPGI के निदेशक डॉ. आर.के. धीमान, KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एम. सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में RT-PCR किट, ओसेल्टामिविर कैप्सूल/सिरप और H1N1 वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने दवाओं और जांच संबंधी संसाधनों की लगातार उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।
घर बैठे डॉक्टर से मिलेगी सलाह, टेलीकंसल्टेशन पर जोर
सीएम योगी ने टेलीकंसल्टेशन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मरीजों को घर बैठे चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना है, जिन्हें तत्काल अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं है।
सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
मुख्यमंत्री ने गंभीर लक्षणों को लेकर लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया। सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द, अत्यधिक सुस्ती, लो ब्लड प्रेशर या बलगम में खून आना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को बिना देरी किए अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई है।
मास्क और हैंड हाइजीन को लेकर चलेगा जागरूकता अभियान
सरकार सार्वजनिक स्थानों पर हैंड हाइजीन और मास्क के इस्तेमाल को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों तक सही और प्रमाणित जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि अफवाहों पर रोक लगे और स्वाइन फ्लू को लेकर अनावश्यक डर या पैनिक की स्थिति पैदा न हो।
मुख्यमंत्री का जोर साफ है—बीमारी की रोकथाम के साथ समय पर जांच और गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए।
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