Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर बन रहा खास संयोग, जानें कब होगा कान्हा का जन्मोत्सव और पूजा का शुभ मुहूर्त
रोहिणी नक्षत्र में होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, घरों-मंदिरों में सजेंगी बाल गोपाल की झांकियां; पंचामृत से अभिषेक के बाद लगेगा माखन-मिश्री का भोग
लखनऊ, अमृत विचारः भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृषभ राशि के चंद्रमा में हुआ था।

उन्होंने बताया कि 4 सितंबर को सुबह से रात 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। हर्षण योग दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा, जिसके बाद वज्र योग शुरू होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। इस कारण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग रहेगा।

घरों में सजेंगी झांकियां, बाल गोपाल का होगा अभिषेक
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ समय रहेगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में बाल गोपाल की झांकी सजाकर उन्हें झूला, पालना, बांसुरी, मोर पंख और फूलों से सजाएंगे। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। माखन-मिश्री, धनिये की पंजिरी और मखाने की खीर का भोग लगाया जाएगा। जन्माष्टमी व्रत से ऐश्वर्य, यश, कीर्ति और मनोकामना पूर्ति का फल मिलता है। मान्यता है कि व्रत और लड्डू गोपाल की सेवा से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है।
