बरेली: टूटी खिड़कियां, टॉयलेट जाम और टपकती है छत, कैसे बनेंगे ए प्लस
बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय नैक में ए प्लस ग्रेड पाने की तैयारी कर रहा है लेकिन उसकी तैयारियां इस अरमान पर पानी फेरती नजर आ रही हैं। नैक की टीम जिन प्रमुख बिंदुओं पर निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। उसके हिसाब से छात्रावासों की हालत खराब है। खिड़कियां टूटी हैं। गंदगी का …
बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय नैक में ए प्लस ग्रेड पाने की तैयारी कर रहा है लेकिन उसकी तैयारियां इस अरमान पर पानी फेरती नजर आ रही हैं। नैक की टीम जिन प्रमुख बिंदुओं पर निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। उसके हिसाब से छात्रावासों की हालत खराब है। खिड़कियां टूटी हैं। गंदगी का अंबार है। टायलेट चोक हैं। किचन में खाने की व्यवस्था ठीक नहीं है। ओपन जिम है लेकिन इस्तेमाल में नहीं है। विभागों ने भी तैयारियां पूरी नहीं की हैं। ऐसे में ए प्लस ग्रेड पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अधूरी तैयारियों की वजह से ही नैक की तैयारियों की बैठक दो बार टल चुकी है। जल्द ही इसे लेकर बैठक होगी। बैठक के बाद ही नैक की टीम को दौरे के लिए विश्वविद्यालय में बुलाया जाएगा।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में जल्द ही नैक की टीम दौरा करने वाली है। उससे पहले विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति तैयारियों में जुटी है। इसे लेकर कुछ ही दिनों में बैठक होने वाली है। इससे पहले दो बार अधूरी तैयारियों को लेकर बैठक टल चुकी है। विश्वविद्यालय को अच्छी ग्रेड दिलाने के लिए विश्वविद्यालय में इन्क्यूबेशन सेंटर, ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस समेत कई नई व्यवस्था शुरू करने के प्रस्ताव भी तैयार किए जा चुके हैं। कुलपति ने सभी विभागों से टीचिंग, लर्निंग, नए कोर्स, सीटों की संख्या, छात्रावासों के हालात, इंफ्रास्ट्रक्चर, पुराने कोर्सों में बदलाव, टीचर, स्टूडेंट का फीडबैक मैनेजमेंट समेत कई प्वाइंट्स पर रिपोर्ट मांगी है लेकिन अभी तक विभागों के द्वारा रिपोर्ट नहीं दी गई है।

कुलपति ने रविवार को अचानक विश्वविद्यालय के छात्रावासों का निरीक्षण किया तो भी कई सारी खामियां निकलकर सामने आ गई थीं। छात्रावासों की खिड़कियां टूटी पड़ी हैं। ठंड से बचने के लिए छात्र गत्ते लगाकर काम चला रहे हैं। छात्रावास परिसर में पानी भरा है। पानी में जलीय पौधे उग आए हैं। आसपास की झाड़ियों से सांप भी निकल आते हैं। बाथरूम में लीकेज है। दीवारों में सीलन है। पानी टपक रहा है। पीने के साफ पानी के लिए लगा वॉटर प्यूरीफायर खराब है।
खानों के लिए छोटे-छोटे कई किचन बना रखे हैं जबकि बड़ा किचन होना चाहिए। यहां तक कि नवीन छात्रावास का भवन भी अभी तक हैंडओवर नहीं हुआ है। ओपन जिम तो विश्वविद्यालय में है लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं होता है। इसी तरह से अन्य ढेरों खामियां विश्वविद्यालय में हैं। जब तक इन्हें दुरुस्त नहीं किया जाता है तब तक विश्वविद्यालय को अच्छी ग्रेड मिलना मुश्किल है।
हर कीमत पर ए प्लस ग्रेड तक पहुंचना होगा
रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन द्वारा सोमवार को नव वर्ष के उपलक्ष्य में एक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत किए जाने वाले सभी महत्वपूर्ण कार्यों के विषय में कर्मचारियों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जल्द ही विश्वविद्यालय में नैक टीम का दौरा होना है। नैक की रैंकिंग से ही विश्वविद्यालय की गुणवत्ता तय होगी। वर्तमान में विश्वविद्यालय को जो ग्रेड प्राप्त है वह संतोषजनक नहीं है। इसे हर कीमत पर ए प्लस ग्रेड तक पहुंचना ही होगा।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए सभी कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि काम तीन तरह से किए जाते हैं। पहला है काम का जिक्र, दूसरा पिक और तीसरा क्रियान्वयन है। यदि इन तीनों में से एक भी छूट जाता है तो काम पीछे ही छूट जाता है। कुलपति ने कहा कि एक समिति का गठन किया है जो कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों को तत्काल निस्तारित करेगी। कार्यक्रम में कुलसचिव डा. सुनीता पांडे, वित्त अधिकारी केके संखवार, उप कुलसचिव आनंद कुमार मौर्य एवं उप कुलसचिव सुनीता यादव, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जहीर अहमद, रंजीत सिंह व अन्य मौजूद रहे।
