बरेली: भीख मांगने वाले बच्चों की काउंसिलिंग शुरू

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को जब जीवनयापन के लिए सड़कों पर भीख मांगते देखा जाता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारों ने बच्चों की पढ़ाई तथा कल्याण के लिए शुरू की करोड़ों की योजनाओं का लाभ इन तक नहीं पहुंच रहा है। समाज के इस ज्वलंत मुद्दे …

अमृत विचार, बरेली। देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को जब जीवनयापन के लिए सड़कों पर भीख मांगते देखा जाता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारों ने बच्चों की पढ़ाई तथा कल्याण के लिए शुरू की करोड़ों की योजनाओं का लाभ इन तक नहीं पहुंच रहा है। समाज के इस ज्वलंत मुद्दे को पिछले 2 दिनों से बाल भिक्षाटन मुक्त बरेली अभियान से अमृत विचार प्रकाशित कर रहा है। अमृत विचार की खबर का असर यह हुआ है कि जिला प्रशासन और सीडब्ल्यूसी ऐसे बच्चों को न सिर्फ चिन्हित कर रहे हैं बल्कि उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है।

सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, परंतु फिर भी भारी संख्या में घुमंतू परिवारों के बच्चों तक इसकी किरणें नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में अमृत विचार ने बाल भिक्षाटन मुक्त बरेली नाम से अभियान शुरू किया तो पड़ताल में मालूम हुआ कि अधिकांश बच्चों के माता-पिता ही उनसे भीख मंगवाते हैं। ऐसे में अब प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिये जिला प्रशासन को चाइल्डलाइन टीम गठित कर ऐसे परिवारों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के इस अभियान के साथ अमृत विचार भी पिछले दो दिनों से कदम ताल मिलाते हुए बाल भिक्षाटन मुक्त बरेली अभियान चलाकर समाज के इस कुरीति को खत्म करने के लिए प्रयासरत है। इसी दिशा में बुधवार को चाइल्डलाइन की टीम चौकी चौराहे पर पहुंची तो यहां सड़कों पर अपना गुजर-बसर कर रहे घुमंतु परिवार से पुलिस के साथ पूछताछ की।

बच्चों से बातचीत के दौरान ही वहां उनके अभिभावक भी आ गए और पुलिस से अभद्र व्यवहार करने लगे। इस दौरान वहां पर एक महिला भड़क गई। महिला को चाइल्डलाइन की टीम ने काफी समझाया और उसे सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही, तब कहीं महिला शांत हुई।

शहर में कई स्थानों पर नजर आ जाएंगे भीख मांगते बच्चे
शहर में बस स्टैंड से लेकर स्टेशन, चौकी चौराहा जैसे तमाम जगहों पर यह बच्चे घूमते देखे जा सकते हैं। जहां यह बच्चे भीख मांगते नजर आ जाएंगे। प्रदेश सरकार ने हाल ही में जिले में साइलेंट टीम गठित कर ऐसे प्रभावों को चिन्हित करने साथ उनके परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए अग्रेषित करने का निर्णय लिया है।

बस स्टैंड पर दौड़ती बसों में तथा बसों से बाहर भीख मांगते समय कभी भी दुर्घटना होने का डर रहता है। परंतु पेट पालने की दौड़ में ऐसे बच्चे अपनी जिदगी पर दांव लगाए हुए हैं।

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