बरेली: पहले धान अब गन्ना खरीद में हावी हो गए बिचौलिये
अमृत विचार, बरेली। अधिकारी भले ही सख्ती करने का दावा करें लेकिन जिले में धान, गेहूं व गन्ना की सरकारी खरीद में बिचौलियों का काकस तोड़ना शासन व जिला प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम साबित नहीं होता। यही वजह है समर्थन मूल्य नहीं मिलने पर धान औने-पौने दाम में बेचने वाले किसान अब …
अमृत विचार, बरेली। अधिकारी भले ही सख्ती करने का दावा करें लेकिन जिले में धान, गेहूं व गन्ना की सरकारी खरीद में बिचौलियों का काकस तोड़ना शासन व जिला प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम साबित नहीं होता। यही वजह है समर्थन मूल्य नहीं मिलने पर धान औने-पौने दाम में बेचने वाले किसान अब गन्ना खरीद में हावी बिचौलियों से परेशान हैं। उनका न तो समय से गन्ना तुल रहा है और न ही पर्चियां मिल रही हैं। घटतौली की शिकायतें भी आम हो चुकी हैं, जबकि पूर्व में इसको लेकर गन्ना आयुक्त सख्त निर्देश जारी कर चुके हैं।
आलम यह है कि जिले के कुछ क्षेत्रों में चीनी मिलों ने गन्ना खरीद के लिए जगह-जगह क्रय केंद्र तो लगवा दिए मगर, गन्ना विभाग की लचर व्यवस्था की वजह से घटतौली पर अंकुश नहीं लग सकी है। केंद्र प्रभारी और बिचौलियों की साठगांठ में किसान फंसकर रह गया है। किसानों के मुताबिक हर वाहन को तौलते समय दो से तीन क्विंटल तक गन्ना सेंटर इंचार्ज लेते हैं। इतना ही नहीं गन्ना तौल के लिए पांच से सात दिन का इंतजार भी करना पड़ता है।
72 क्विंटल तक की बनाई जा रहीं पर्ची
शासन का निर्देश है गन्ना समेत ट्राली का वजन 68 क्विंटल होना चाहिए। इससे अधिक पर पर्ची नहीं बनाने का फरमान जारी किया गया है। मगर, जिले के नवाबगंज, बहेड़ी समेत कुछ क्षेत्रों के कई केंद्रों पर मानक ताक पर रखकर 70 से 72 क्विंटल तक की पर्ची बनाई जा रही है। इसके अलावा खाली वाहन की पर्ची भी हाथ से लिखे जाने का खेल चल रहा है, जबकि नियमानुसार इसे मशीन से गन्ने का शुद्ध वजन प्रिंट कर बनाना चाहिए।
इस सत्र में 54 प्रतिशत से अधिक का किया भुगतान
कृषि विधेयक को लेकर यूपी समत कई राज्यों में घमासान मचा है। एक महीने से आंदोलनकारी किसान सड़कों पर डटे हैं। विपक्षी पार्टियां भी गन्ना भुगतान समेत किसानों की कई अन्य समस्याओं का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने में लगी हैं। वहीं, गन्ना विभाग ने बीते पेराई सत्र का गन्ना बकाया मूल्य भुगतान का रिकार्ड और इस पेराई सत्र के भुगतान की स्थिति स्पष्ट की है।
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया गन्ना किसानों के भुगतान आदि को लेकर विभाग संवेदशीलता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सत्र के शेष भुगतान की प्रक्रिया तेजी के साथ शुरू की जा चुकी है। जबकि चालू सत्र का भी 54 प्रतिशत से अधिक गन्ना का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।
इनकी सुनें-
शासन व जिला प्रशासन भले ही सख्ती का दावा करें, लेकिन किसानों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। धान की तौल में बिचौलिया का बोलबाला रहा था, वहीं अब गन्ना खरीद में भी कुछ माफिया किस्म के लोग हावी हो गये हैं, जो केंद्र पर जमे हैं। -मो. रफीक, गन्ना किसान
दो दिन पहले गन्ना भरी ट्राली तौल करने केंद्र पर पहुंचे तो सेंटर इंचार्ज ने कुछ समय इंतजार करने की बात कही। क्रय केंद्रों पर तीन प्रतिशत तक गन्ने की घटतौली हो रही है। अफसरों की सुस्ती की वजह से सब कुछ जानते हुए भी मजबूरी में सहना पड़ रहा है। -धर्मदास, गन्ना किसान
घटतौली के संबंध में अभी किसी ने कोई शिकायत नहीं की है। इस तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित केंद्र प्रभारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मानक से अधिक गन्ना तौल की पर्ची दिए जाने का मामला गंभीर है। शिकायत मिलने पर इसकी जांच कराएंगे। -पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
