बरेली: दूध के दांत भी होते हैं महत्वपूर्ण, जानें बाल रोग विशेषज्ञ से

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। हम सभी जानते हैं कि मनुष्य के जीवनकाल में दो बार दांत आते हैं, पहले दूध के दांत जो जन्म के छह महीने बाद आते है और पक्के दांत उगने से पूर्व स्वत: गिर जाते हैं। पक्के दांत जन्म के छह वर्ष बाद उगते हैं और जीवनपर्यंत रहते हैं। ऐसे में सवाल …

बरेली, अमृत विचार। हम सभी जानते हैं कि मनुष्य के जीवनकाल में दो बार दांत आते हैं, पहले दूध के दांत जो जन्म के छह महीने बाद आते है और पक्के दांत उगने से पूर्व स्वत: गिर जाते हैं। पक्के दांत जन्म के छह वर्ष बाद उगते हैं और जीवनपर्यंत रहते हैं। ऐसे में सवाल आता है कि यदि दूध के दांत गिर ही जाने है, तो क्या आवश्यकता है उनकी साफ-सफाई व संरक्षण की? आइये जानते है बाल दंत विशेषज्ञ से…

बच्चों के दूध के दांतों की महत्ता:
– बच्चों में दूध के दांत भोजन को सही तरह से चबाने के काम आते हैं, जिससे भोजन को पचाना आसान हो जाता है। यदि दांतों में दर्द हो या कीड़ा लगा हो, तो बच्चे सही से भोजन नहीं कर पाते हैं और वह उनके कुपोषण का कारण बनता है।
– बच्चों के दूध के दांतों की सफाई नियमित रूप से न हो तो उससे दांतों में पीलापन और दुर्गंध उत्पन्न होती है, जिससे लोगों द्वारा बच्चों को चिढ़ाये जाने पर, उनके मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है और वे बचपन से ही गुस्सैल व चिड़चिड़े हो जाते हैं।
– दूध के दांतों की जड़े जबड़े में पक्के दांतों के बहुत करीब होती है, इस कारण यदि इंफेक्शन दूध के दांतों में हो तो वह विकसित होते पक्के दांतों तक भी पहुंच जाता है, जिससे पक्के दांत भी खराब हो जाते हैं और जल्दी गिर जाते हैं।
– दूध के दांत विकसित होते ही पक्के दांतों को जबड़े में सही दिशा व स्थान पर उगने में सहायता करते हैं। इसी कारण बच्चे के जबड़े का विकास सही रूप से होता है और उनके चेहरे की बनावट सामान्य रूप से हो पाती है।
– दूध के दांत यदि समय से पूर्व गिर जाए तो पक्के दांत टेढ़े-मेढ़े उगते हैं। जिसके कारण बच्चों में तोतलापन भी हो सकता है। आगे से दूध के दांत जल्दी गिर जाने से उन्हें द, फ, जैसे वर्ण उच्चारण में कठिनाई आती है।
– बच्चों के दूध के दांतों में पाया जाने वाले साफ्ट-टिश्यू (पल्प) में स्टेम सेल्स होती है जिनके कई बीमारियों के इलाज में उपयोगिता पर कई शोध किए जा चुके है और उनकी स्टेम सेल्स को संरक्षित किया जा रहा है।

कैसे करें बच्चों के दूध के दांतों की सुरक्षा
– बच्चों के दूध के दांतों का विकास जन्म से पूर्व ही, छह सप्ताह की गर्भावस्था से आरंभ हो जाता है। अत: माता को कैल्शियम, प्रोटीन, मल्टीमिनरल, विटामिन-डी युक्त भोजन प्रचुर मात्रा में करना चहिए जो कि हडि्डयों व दांतों को मजबूत बनाते हैं।
– बच्चों के दूध के दांत आने से पूर्व भी बच्चों के मसूड़ों को साफ पानी में भिगोकर रुई के फाहे से साफ करते रहना चाहिए।
– दूध की बोतल लंबे समय तक या रात भर के लिए बच्चे के मुंह से लगाकर न छोड़ें, इससे बच्चों के दांतों में कैविटिस/कैरिज का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
– दांत उगने पर बच्चों मे दिन में दो बार मुलायम (अल्ट्रासाफ्ट) ब्रुश से मंजन करने की आदत डालें।
– ध्यान रहे मंजन मटर के दाने जितना टूथपेस्ट लेकर धीरे-धीरे 2-3 मिनट तक करें।
– टूथपेस्ट फ्लोराइड-युक्त होना चाहिए जिससे दांतों में कैरिज/कैविटिज का खतरा नहीं रहता है।
– बच्चों को अधिक मीठा, चिपचिपा भोजन न करने दें जो कैरिज होने का मुख्य कारण है और कुछ भी खाने के बाद कुल्ला करने की आदत डालें।
– बच्चों को छह महीने के अंतराल पर बालदंत विशेषज्ञ के पास नियमित जांच व परामर्श के लिए ले जाएं। बच्चों के दांतों पर फ्लोराइड वार्निश लगवाएं, जिससे उनके दांतों में कैरिज होने का खतरा कम हो जाता है।

समाज में फैली लोकभ्रांतियों व मिथकों से बचें
– कभी-कभी बच्चे के जन्म के साथ या जन्म के एक महीने के अंदर दांत उगने लगते हैं, जिसे एक बुरा प्रतीक माना जाता है। परंतु यह मात्र एक मिथक है। इन दांतों को नेटल या नियोनेटल टूथ कहा जाता है और उनका उगना सामान्य बात है।
– समाज में आज भी कई लोकभ्रांतियां हैं जैसे कि दूध के दांत का कोई महत्व नहीं यदि वे गिरने ही है तो उनका इलाज कराना आवश्यक नहीं है। दूध के दांतों की सफाई करना जरूरी नहीं होता है या दूध के दांतों में हुए इंफेक्शन से कोई खतरा नहीं होता है, इत्यादि। लेकिन दूध के दांतों का संरक्षण, सफाई व सुरक्षा उतनी ही आवश्यक है जितनी पक्के दांतों की।

क्या होगा परिणाम दूध के दांतों के प्रति लापरवाही का
उगने वाले पक्के दांत दूध के दांतों के नीचे जबड़े की हड्डी में दूध के दांतों की जड़ों के बहुत पास होते हैं। अत: इंफेक्शन दूध के दांतों से हड्डी व पक्के दांतों तक पहुंच जाता है, इसलिए कभी ये नहीं सोचना कि दूध के दांतों की सुरक्षा आवश्यक नहीं है और उनके खराब होने से पक्के दांत खराब नहीं हो सकते हैं।

बाल दंत विशेषज्ञ ही डेंटिस्ट्री की एकमात्र शाखा है, जो बच्चों के जन्म से युवावस्था तक उनके दांत, मुंह, चेहरा, मानसिक व शारीरिक विकास व उनमें आने वाली कठिनाइयों के निवारण से संबधित है।
– यहां बच्चों के पौष्टिक व संतुलित आहार एवं कुपोषण संबधित परामर्श दिया जाता है।
– यहां बच्चों की मनोदशा को समझकर उनका व्यवहार प्रबंधन किया जाता है।
– बच्चों के दांतों को कैरिज से बचाने के लिए उन पर फ्लोराइड जैल, वार्निश या सीलेन्ट लगाए जाते हैं।
– कैरिज/कैविटी का इलाज किया जाता है।
– दांतों के नसों का इलाज (पल्पेक्टमी, पल्पोटमी) किया जाता है।
– टूटे दांतों को बनवाना या कैप चढ़वाना
– दांतों के पीलेपन व दुर्गंध का इलाज
– अंगूठा चूसना, नाखून चबाना, दांत किटकिटाना, जीभ बार-बार बाहर निकालना जैसी आदतों को छुड़वाना।
– जन्मजात मुंह व दांतों से संबधित बीमारियों का इलाज।
– कटे होठ व तालू की सर्जरी
– स्पेशल या अनकॉपरेटिव चाइल्ड के इलाज के लिए जनरल एनेस्थिसिया की सुविधा भी उपलब्ध है।

“पूरे बरेली में बाल दंत विशेषज्ञ की उत्तम टीम इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल सांइसेज (आईडीएस) बरेली में आपके बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध है।” -डा. सत्यजीत नायक, प्राचार्य एवं बाल दंत रोग विशेषज्ञ, इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, बरेली

संबंधित समाचार