बरेली: 6 महीने में प्रवेश प्रक्रिया हुई पूरी, खाली रह गईं सीटें

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। विश्वविद्यालय में सत्र 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया छह माह में पूरी तो हो गई लेकिन सीटें अभी भी खाली रह गई हैं। 13 जनवरी को प्रवेश के आवेदनों की त्रुटियों को दूर करने के लिए विशेष शिविर का भी आयोजन किया गया था। अब प्रवेश नहीं होंगे। बार-बार प्रवेश की तारीख बढ़ाने …

अमृत विचार, बरेली। विश्वविद्यालय में सत्र 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया छह माह में पूरी तो हो गई लेकिन सीटें अभी भी खाली रह गई हैं। 13 जनवरी को प्रवेश के आवेदनों की त्रुटियों को दूर करने के लिए विशेष शिविर का भी आयोजन किया गया था। अब प्रवेश नहीं होंगे।

बार-बार प्रवेश की तारीख बढ़ाने और सभी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों में काफी सीटें खाली रह गई हैं। विश्वविद्यालय अब स्नातक और परास्नातक में प्रवेश और खाली सीटों का रिकार्ड तैयार कर रहा है। कई महाविद्यालय ऐसे हैं जिनमें बीए की 2 हजार से अधिक सीटें हैं लेकिन प्रवेश सिर्फ 150 सीटों पर ही हो सका है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय के पोर्टल पर सीट की उपलब्धता का कॉलम भी एरर दिखाने लगा है।

विश्वविद्यालय ने 2 मई 2020 से स्नातक और परास्नातक में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन फार्म विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भरवाए गए थे। प्रवेश लेने वाले छात्रों को महाविद्यालय के पोर्टल पर भी आवेदन करना था। प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही निजी महाविद्यालयों ने छात्रों की सीट अपने यहां लॉक कर दी थी जिसकी वजह से कई छात्र भटकते रहे थे।

निजी महाविद्यालयों में सीटें खाली रहीं तो कोरोना का बहाना बनाकर कई बार आवेदन और प्रवेश की तिथि बढ़ाने का दबाव विश्वविद्यालय पर डाला गया। विश्वविद्यालय ने भी अधिक छात्रों के प्रवेश के लिए तारीख बढ़ाई। स्नातक के प्रवेश अक्टूबर 2020 तक हुए। उसके बाद स्नातक के परिणाम घोषित होने के बाद परास्नातक में प्रवेश की प्रक्रिया तेज हुई।

इसमें भी प्रवेश 28 दिसंबर 2020 तक हुए। करीब 6 महीने तक चली प्रवेश प्रक्रिया के बावजूद कई छात्रों के प्रवेश में दिक्कत रह गई थी। किसी की फीस जमा नहीं थी तो किसी की सीट लॉक नहीं हुई थी। इन सभी दिक्कतों के लिए 13 जनवरी को विश्वविद्यालय ने विशेष शिविर का आयोजन किया जिसमें महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों के अपने छात्रों की समस्या के निस्तारण के निर्देश दिए थे।

अब त्रुटियों को दूर करने के बाद फाइनल डाटा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि कितनी सीटों पर प्रवेश नहीं हुआ है। बरेली कॉलेज और सरकारी महाविद्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश महाविद्यालयों का यही हाल है। सीबीगंज स्थित एक महाविद्यालय में बीए की 2 हजार से अधिक सीटें हैं जिनमें सिर्फ 150 सीटें ही भर सकी हैं।

इसी तरह शाहजहांपुर रोड स्थित एक महाविद्यालय की 50 फीसदी सीटें खाली रह गईं। इन महाविद्यालयों ने प्रवेश के लिए सभी पैंतरे अजमाए, फिर भी सीटें नहीं भर सके क्योंकि इन महाविद्यालयों की फीस अधिक है। कोरोना काल में अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से भी छात्रों ने उन्हीं महाविद्यालयों में प्रवेश लिया जिनकी फीस कम थी।

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