बरेली: कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बार्डर पर डटे बरेली के किसान

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अमृत विचार, बरेली। कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बार्डर पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले बड़ी संख्या में विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता आंदोलनरत किसानों के समर्थन में डटे हैं। उन्होंने एलान किया है जब तक कानून वापस नहीं लिए जाते तब तक धरना जारी रहेगा। बता दें कि दिसंबर के …

अमृत विचार, बरेली। कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बार्डर पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले बड़ी संख्या में विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता आंदोलनरत किसानों के समर्थन में डटे हैं। उन्होंने एलान किया है जब तक कानून वापस नहीं लिए जाते तब तक धरना जारी रहेगा।

बता दें कि दिसंबर के पहले सप्ताह से भाकियू के बैनर तले किसानों की मांगों के समर्थन में बड़ी संख्या में बरेली के किसान जिलाध्यक्ष की अगुवाई में डटे हैं। राष्ट्रीय लोकदल समेत कई अन्य संगठन भी दिल्ली कूच कर चुके हैं लेकिन सरकार अब भी कृषि कानून वापस लेने को तैयार नहीं है।

भाकियू के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने फोन पर हुई वार्ता में बताया कि किसानों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार की हठधर्मिता समझ से परे है। आंदोलन में मंडल के हजारों किसान हैं। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने किसान नेता टिकैत से बातचीत की बात भी कही।

इधर, राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष बाकर अली ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित तीनों कृषि कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। इसे लेकर हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की तरफ जाने वाले रास्ते को घेरकर आंदोलन पर डटे हैं। कहा कि इन कानूनों के लागू होने से किसान बर्बाद हो जाएगा।

किसानों के हित को देखते हुए बिल वापसी के लिए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा चुका है। फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो तमाम किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जिले के किसान दिल्ली कूच कर गए। कड़ाके की ठंड में आंदोलनकारी किसानों के साथ तमाम पदाधिकारी धरने पर बैठे हैं लेकिन स्थिति जस की तस है। अत: ठान लिया है कि जब तक कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक सड़क से संसद तक किसानों के हित में संघर्ष जारी रहेगा।

‘आक्रोश भड़का तो सरकार को लेने के देने पड़ जाएंगे’
जनसेवा सहायक पार्टी का क्रमिक अनशन रविवार को भी दामोदर स्वरूप पार्क में जारी रहा। जिलाध्यक्ष उल्फत सिंह कठेरिया ने कहा कि नए कृषि कानूनों से किसानों में आक्रोश है। अगर केंद्र सरकार तत्काल तीनों कानून वापस नहीं लेती है तो पार्टी सभी संगठनों के साथ मिलकर सरकार कि ईंट से ईंट बजा देगी।

डा. ओमप्रकाश लोधी ने कहा कि केंद्र सरकार की मनमानी से तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश के किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। अन्नदाता के समर्थन में सभी वर्ग लामबंद होकर सरकार से कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। लिहाजा कृषि कानून वापस नहीं होने तक अनशन जारी रहेगा। प्रदेश महामंत्री मोहर सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून लेकर आना चाहिए। सुशील कुमार गौतम, महेश कठेरिया, नरेश कुमार, विष्णु मौर्य, प्रधान ओम राधेश्याम लोधी आदि मौजूद रहे।

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