बरेली: किसान परेशान, केंद्र हो गए बंद…अब कहां ले जाएं महीन धान
अमृत विचार, बरेली। देवरनिया में करीब 100 बीघा में किसान मुन्न्ना लाल ने धान की उन्नत किस्मों में शामिल पीआर-126 प्रजाति की बुवाई की। 90 क्विंटल धान लेकर वह केंद्र पर बेचने गए तो महीन धान बताकर केंद्र प्रभारी ने लौटा दिया। इसके बाद भी वह काफी दिनों तक इंतजार करते रहे, खरीद अंतिम चरण …
अमृत विचार, बरेली। देवरनिया में करीब 100 बीघा में किसान मुन्न्ना लाल ने धान की उन्नत किस्मों में शामिल पीआर-126 प्रजाति की बुवाई की। 90 क्विंटल धान लेकर वह केंद्र पर बेचने गए तो महीन धान बताकर केंद्र प्रभारी ने लौटा दिया। इसके बाद भी वह काफी दिनों तक इंतजार करते रहे, खरीद अंतिम चरण में पहुंची लेकिन धान नहीं खरीदा गया।
ऐसे में वह इस किस्म का धान उगाकर फंस गए हैं। इसी तरह बहेड़ी के लालाराम गंगवार ने 60 बीघा में बासमती, सरबती किस्म के धान की बुवाई की, केंद्रों पर रिकवरी कम निकलने की बात कहकर खरीद से इंकार कर दिया गया। बाजार में 1200 रुपये क्विंटल का भाव दिया जा रहा था। इसलिए धान नहीं बेचा।
इसी तरह जिले के तमाम किसान हैं जिन्होंने अच्छा मुनाफा मिलने की आस में इसी किस्म का धान बोया और अब वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे सरकार की धान खरीद नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है। जिले में एक अक्टूबर से शुरू धान की सरकारी खरीद 31 जनवरी तक होनी है। अफसर लक्ष्य से अधिक धान खरीद होने का दावा कर रहे हैं लेकिन इस बार कोरोना काल में परेशान किसानों पर दोहरी मार पड़ी है।
शासन ने किसानों की सहूलियत के लिए भले ही दो किस्म के धान का रेट कामन और ग्रेड में तय कर दिया लेकिन उच्च किस्म के धान का रेट तय नहीं किया जिसकी वजह से जिले के सैकड़ों किसान अब भी परेशान हैं। अच्छी प्रजाति के पतले धान की बुवाई से महीन चावल देने वाले हाइब्रिड और पीआर-126 किस्म के धान की खेती जिले के आंवला, नवाबगंज समेत कुछ स्थानों पर बड़े पैमाने पर होती है।
बाजार में इसका औसतन मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल तक लगाया जाता है, लेकिन इस रेट पर आढ़ती या मिलर्स नहीं खरीदते। इसके अलावा बासमती, सरबती, सुंगध आदि प्रतातियों से संबंधित महीन धान की भी सरकारी केंद्रों पर इस बार खरीद नहीं की गई है। मानक गिनाकर सिर्फ मोटी प्रजाति पीआर-113 का धान सरकारी केंद्रों पर खरीदा गया।
केंद्र प्रभारी जब महीन धान लेकर पहुंचे तो उनको यह कहकर लौटा दिया कि पतली प्रजाति के धान की रिकवरी कम है। ऐसे में अब किसानों को बासमती, सुगंधा, रेश्मा प्रजाति का हजारों क्विंटल धान कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ा है। जिससे उनकी लागत निकलना मुश्किल हो गई। उनके मुताबिक लागत बढ़ने और कीमत कम मिलने से परेशान अन्नदाता सिस्टम को कोस रहे हैं।
खरीद न होने पर सड़ गया हजारों क्विंटल धान
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकार बताते हैं मानक निर्धारित होने पर केंद्रों पर केवल कॉमन धान ही लिया जाता है। महीन प्रजाति का धान नहीं खरीद जाता, इसलिए किसान कम कीमत में धान बेचने को मजबूर होते हैं। वहीं, अच्छे किस्म वाले इस धान की खरीद नहीं होने पर सरकार की धान खरीद नीति पर आंवला के सिकरोड़ा में करीब 450 बीघा में खेती करने वाले प्रगतिशील किसान विजय चौहान ने सवाल उठाए हैं। इनको सैकड़ों क्विंटल धान जहां खुले बाजार में कम दाम में बेचना पड़ा वहीं, हजारों क्विंटल धान बारिश में भी भीगने से सड़ने पर किसानों को काफी घटाना पड़ा है।
धान रिकवरी की बताई गई मजबूरी
आरएमओ राममूर्ति वर्मा ने बताया धान और उनसे थोड़े महीन धान से करीब 67 फीसदी चावल की रिकवरी होती है। जिसे खाद्यान्न वितरण और एमडीएम के लिए प्रयोग में लाया जाता है। लेकिन महीन धान जैसे सर्बती, बासमती आदि का रिकवरी सिर्फ 60 फीसदी तक होती है, इसलिए इसकी खरीद मनाही है।
