कृषि कानून: कमेटी के सदस्य का बड़ा बयान, ‘अगर ऐसा हुआ तो अगले 50 साल तक मरता रहेगा किसान’
नई दिल्ली। कृषि कानूनों को लेकर उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित समिति किसानों और किसान संगठनों से बातचीत करेगी। समिति की मंगलवार को यहां हुयी पहली बैठक में तीन सदस्यों ने हिस्सा लिया। इन सदस्यों में अशोक गुलाटी, अनिल घनवत और प्रमोद जोशी शामिल थे। समिति के एक सदस्य भूपिन्दर सिंह मान ने पहले …
नई दिल्ली। कृषि कानूनों को लेकर उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित समिति किसानों और किसान संगठनों से बातचीत करेगी। समिति की मंगलवार को यहां हुयी पहली बैठक में तीन सदस्यों ने हिस्सा लिया। इन सदस्यों में अशोक गुलाटी, अनिल घनवत और प्रमोद जोशी शामिल थे। समिति के एक सदस्य भूपिन्दर सिंह मान ने पहले ही इस समिति से अपने को अलग कर लिया था।
घनवत ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि समिति कृषि कानूनों का विरोध और समर्थन करने वाले किसानों एवं किसान संगठनों से बातचीत करेगी। समित राज्य सरकारों, राज्य विपणन बोर्ड, किसान उत्पादक संगठन, सहकारिता और अन्य संबंधित पक्षों से भी चर्चा करेगी। किसान संगठनों को जल्दी ही बातचीत के लिए आमंत्रित किया जायेगा। किसान निजी तौर पर भी पोर्टल पर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं।
कमेटी के सदस्य और किसान नेता अनिल घनवत ने कहा कि पिछले 70 सालों से किसानों की हालत में कोई सुधार नहीं आया है, ये सभी मानते हैं और इसलिए कानून में बदलाव की जरूरत है। घनवत ने कहा कि वो भी कानूनों को पूरा ठीक नहीं मानते हैं, लेकिन किसानों को अपनी शिकायतें कमेटी के सामने रखनी चाहिए।
अनिल घनवत ने कहा, “ये तो तय है कि अभी तक किसानों को लेकर जो नीतियां और कानून रहे हैं, वो नाकाफी हैं क्योंकि अगर ऐसा होता तो 4.5 लाख किसान आत्महत्या नहीं करते। कुछ बदलाव की ज़रूरत तो है। अगर ये कानून वापस होते हैं, तो अगले 50 साल तक कोई भी सरकार या पार्टी ऐसा करने की हिम्मत और धैर्य नहीं दिखा पाएगी और किसान मरता रहेगा।” बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने 12 जनवरी को समिति के गठन का आदेश दिया था।
