बरेली: रिश्तों में पड़ी दरार, परामर्श केंद्र में बढ़ा इंतजार

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बरेली,अमृत विचार। पति-पत्नी के रिश्तों में आयी दरार को दूर करने के लिए शिकायत को परामर्श केंद्र भेजा जाता है। यहां भी हर तरीके से समझौता कराने के प्रयास किए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद कई मामले पेंडिंग ही रह जाते हैं। कुछ मामलों में दोनों पक्ष तारीखों पर नहीं आते हैं तो कई मामलों …

बरेली,अमृत विचार। पति-पत्नी के रिश्तों में आयी दरार को दूर करने के लिए शिकायत को परामर्श केंद्र भेजा जाता है। यहां भी हर तरीके से समझौता कराने के प्रयास किए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद कई मामले पेंडिंग ही रह जाते हैं। कुछ मामलों में दोनों पक्ष तारीखों पर नहीं आते हैं तो कई मामलों में लोग समझौते को तैयार ही नहीं होते हैं। यही वजह है कि 103 मामलों को निरस्त कर दिया गया है। बीते वर्ष दिसंबर तक 121 केस परामर्श केंद्र में पेंडिंग पड़े हुए हैं।

बरेली पुलिस द्वारा पुलिस लाइंस और तहसील स्तर पर परिवार परामर्श केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। बीते वर्ष जनवरी से मार्च तक परामर्श केंद्र संचालित हुआ लेकिन बाद में कोरोना की वजह से कई महीने तक परामर्श केंद्र बंद रहे। कोरोना की वजह से लोग घरों में रहे तो पारिवारिक झगड़े भी अधिक बढ़ गए। एसएसपी ऑफिस में भी इस दौरान घरेलू झगड़ों के ही अधिकांश मामले सामने आ रहे थे। उस दौरान मामलों को थाना स्तर पर समझौते के लिए भेजा जाता था लेकिन थाना पुलिस व्यस्त रहती थी। इसकी वजह से अधिकांश मामलों में दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज होती थी।

अनलॉक में फिर से परामर्श केंद्र संचालित हुए। अब पति-पत्नी के झगड़े व दहेज के मामलों को सबसे पहले परामर्श केंद्र में भेजा जा रहा है ताकि घर टूटने से बच जाए। दिसंबर में कुल 76 मामले परामर्श केंद्र में पहुंचे। इससे पहले ही 9 महीनों में आए प्रार्थना पत्रों में से 189 पेंडिंग थे। दिसंबर में कुल 265 प्रार्थना पत्र हो गए। इनमें से सिर्फ 38 मामलों में ही समझौता कराया जा सका। इसके अलावा 103 प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए गए। इनमें समझौता ही नहीं हो सका। तीन मामलों में अभियोग पंजीकृत कराया गया।

दिसंबर में कुल 144 मामलों का निस्तारण किया गया। अब 121 प्रार्थना पत्र पेंडिंग हैं। इन पर जनवरी में सुनवाई की जा रही है। इसके अलावा अन्य मामले भी रोजाना पहुंच रहे हैं। परामर्श केंद्र बुधवार और शनिवार को चलता है। इस दौरान दोनों पक्षों को निर्धारित तिथि पर बुलाया जाता है। परामर्शदाता दोनों पक्षों से बात कर उनकी समस्या जानते हैं और फिर उसका निस्तारण करते हैं। इसके अलावा अन्य दिनों में कागजी कार्रवाई होती है।

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