बरेली: बिना जांच के ही प्रधानों को दी क्लीन चिट
अमृत विचार, बरेली। गांवों में कराए गए विकास कार्यों में जमकर गोलमाल हुआ है। इसकी शिकायतें भी हुईं, लेकिन कुछ प्रधानों पर ही कार्रवाई करके अधिकारियों ने इतिश्री कर ली। जिले के करीब 100 शिकायतकर्ता ऐसे हैं जिन्होंने बताया कि उनके यहां जांच अधिकारी जांच के लिए पहुंचे ही नहीं। इसलिए अब तक उन जांचों …
अमृत विचार, बरेली। गांवों में कराए गए विकास कार्यों में जमकर गोलमाल हुआ है। इसकी शिकायतें भी हुईं, लेकिन कुछ प्रधानों पर ही कार्रवाई करके अधिकारियों ने इतिश्री कर ली। जिले के करीब 100 शिकायतकर्ता ऐसे हैं जिन्होंने बताया कि उनके यहां जांच अधिकारी जांच के लिए पहुंचे ही नहीं। इसलिए अब तक उन जांचों में क्या हुआ। इसकी भी जानकारी नहीं है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे अब मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करेंगे। यह हालात तब हैं, जब शिकायतकर्ता तीन वर्षों से भटकते रहे हैं।
जिले में 1193 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 210 ग्राम पंचायतों के प्रधानों के खिलाफ 800 से अधिक लोगों ने शपथ पत्र देकर शिकायतें की थी। शिकायतकर्ताओं ने गांवों में हुए विकास कार्य जैसे खड़ंजा, मनरेगा सड़क, पौधरोपण, शौचालय निर्माण, आवास, आदि में कई स्थानों पर घपले हुए थे। यही नहीं भुता ब्लॉक के एक गांव में प्रधान ने अपने चारों बेटे को मनरेगा का जॉब कार्ड दिला दिया था। इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने शिकायत की थी, लेकिन जांच अधिकारी तीन माह तक जांच दबाए बैठे रहे।
इसके बाद पीड़ित शिकायतकर्ताओं ने वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना, फरीदपुर विधायक श्यामबिहारी लाल को बताया। तब विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। वहीं, वित्त मंत्री ने जांच कराने के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेजा। इसके बाद जांच अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात का ही रहा। ये ही नहीं 210 ग्राम प्रधानों की शिकायतों में से मात्र 18 से 20 प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई ही हो सकी है। जबकि 190 प्रधानों को क्लीनचिट दे दी गई है।
अब सवाल है कि यदि शिकायतकर्ता झूठे थे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई और यदि शिकायतें सही हैं, तो प्रधानों को क्लीनचिट क्यों दी गई। इस पर अधिकारी जबाव नहीं दे पा रहे हैं। उधर, 57 ग्राम पंचायतों के करीब सौ शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके यहां जांच के लिए अधिकारी आज तक आए ही नहीं। जबकि उन्होंने शपथ पत्र और जगह के फोटो भी दिए थे।
इस संबंध में डीपीआरओ का कहना है कि उनके स्तर से सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। कुछ अधिकारियों के पास जांच के लिए फाइलें गई हैं। उनमें से भी कई लोगों ने रिपोर्ट लगाकर फाइल वापस कर दी है। चुनाव के कारण कुछ लोगों ने गलत तरीके से शिकायत की है। जबकि घोटाले जैसे कहीं पर बात नहीं है।
इतनी जगह नहीं पहुंचे अधिकारी
ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद में चार, बहेड़ी में पांच, भदुपरा में तीन, भोजीपुरा तीन, भुता दो, बिथरीचैनपुर में चार, फरीदपुर में तीन, फतेहगंज पश्चिमी में तीन, क्यारा, मझगवां और मीरगंज में चार-चार, रामनगर में पांच, रिछा चार, शेरगढ़ में तीन शिकायतों का निस्तारण कार्यालयों में बैठकर हुआ है।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अब तक नहीं पता है कि निस्तारण हुआ या शिकायतें पेंडिंग में है। पूछने पर अधिकारी यही कह देते हैं कि अधिकांश शिकायतों का निस्तारण हो चुका है या फिर जांच चल रही है। भुता गांव के एक प्रधान के खिलाफ हुई शिकायत में भी जांच अधिकारी ने लीपापोती कर दी है।
