बरेली: भूमि उपयोग भी बदल डाला, चार पीसीएस अफसरों की मुश्किलें बढ़ीं

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बरेली,अमृत विचार। बरेली-सितारगंज नेशनल हाईवे-74 के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण कर सर्किल रेट से अधिक का मुआवजा बांटने के मामले में संलिप्त चार पीसीएस अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कृषि भूमि के अधिग्रहण में किए खेल की जांच के साथ अधिकारियों के एसडीएम पद पर तैनाती के दौरान भूमि उपयोग (लैंड यूज) बदलने …

बरेली,अमृत विचार। बरेली-सितारगंज नेशनल हाईवे-74 के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण कर सर्किल रेट से अधिक का मुआवजा बांटने के मामले में संलिप्त चार पीसीएस अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कृषि भूमि के अधिग्रहण में किए खेल की जांच के साथ अधिकारियों के एसडीएम पद पर तैनाती के दौरान भूमि उपयोग (लैंड यूज) बदलने की फाइलों की भी जांच शुरू हो गई है।

जांच अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार पांडेय ने मीरगंज, बहेड़ी, सदर, फरीदपुर और नवाबगंज के एसडीएम कार्यालय से धारा 143 की कार्रवाई कर कृषि भूमि का लैंड यूज बदलने की फाइलें तलब की हैं। सदर, मीरगंज और फरीदपुर के एसडीएम कार्यालय से 140 से ज्यादा फाइलें जांच अधिकारी को उपलब्ध करा दी गईं। बहेड़ी और नवाबगंज की 50 से अधिक फाइलें आनी शेष हैं।

जांच अधिकारी के अनुसार भूमि अधिग्रहण से जुड़ी 200 फाइलें हैं। बताया कि चारों अधिकारियों पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय का भी प्रभार रहा था। इनके कार्यकाल में किन-किन प्रोजेक्टों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी इसे भी जांच में शामिल किया जाएगा। उपरोक्त जांच मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद के निर्देश पर कराई जा रही है।

900 रुपये की जगह 4000 रुपये वर्ग मीटर में खरीदना दर्शाया था
बहेड़ी तहसील क्षेत्र के हथमना, माधौपुर और सिरसा गांव के 200 से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। वर्ष 2012-13 में बरेली-सितारगंज नेशनल हाईवे को सात से 10 मीटर चौड़ा करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) को भूमि अधिग्रहीत कराई गई थी। 900 रुपये प्रति वर्ग मीटर का सर्किल रेट तय हुआ था लेकिन किसानों से साठगांठ कर तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पद पर रहे पीसीएस अफसरों ने 900 रुपये प्रति वर्ग मीटर की जमीन को 4000 रुपये वर्ग मीटर में खरीदना दर्शाया था। इसमें कई करोड़ रुपये की गड़बड़ी की गई थी। 16 किसान भी संलिप्त थे। कृषि भूमि को कामर्शियल दिखाया गया था। तत्कालीन कमिश्नर डा. पीवी जगनमोहन ने गड़बड़ी पकड़ी थी। शासन ने अगस्त, 2020 में चारों पीसीएस अफसरों के जनपद में तैनाती की पूरी जानकारी तलब की थी।

तैनाती की अवधि: पीसीएस अधिकारी लक्ष्मीशंकर सिंह 14 सितंबर 2012 से मार्च, 2014 तक, पीसीएस मनीष कुमार नाहर 15 जुलाई 2013 से जनवरी 2016 तक, पीसीएस कुंवर पंकज 8 सितंबर 2014 से 13 मार्च 2018 तक, पीसीएस पुष्पा देवरार 28 जून, 2014 से 13 सितंबर, 2016 तक जिले में तैनात रहीं।

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