बरेली: हंगामे के बीच अक्षर विहार तालाब की भूमि से अवैध निर्माण ढहाया
अमृत विचार, बरेली। सिविल लाइंस क्षेत्र में अक्षर विहार तालाब की जलमग्न भूमि पाटकर किए गए अवैध निर्माण शुक्रवार को बुल्डोजर से ढहा दिए गए। फ्रीहोल्ड हुए पट्टों के कागजातों की लंबी जांच और कई बार नापजोख करने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। अधिकारियों से नोकझोंक …
अमृत विचार, बरेली। सिविल लाइंस क्षेत्र में अक्षर विहार तालाब की जलमग्न भूमि पाटकर किए गए अवैध निर्माण शुक्रवार को बुल्डोजर से ढहा दिए गए। फ्रीहोल्ड हुए पट्टों के कागजातों की लंबी जांच और कई बार नापजोख करने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। अधिकारियों से नोकझोंक के बीच हंगामा हुआ।
लोगों ने नगर निगम व बीडीए की एनओसी के कागजात दिखाए लेकिन अधिकारियों ने एक नहीं सुनीं। तहसील सदर और नगर निगम की संयुक्त टीम ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार पांडेय की मौजूदगी में नापजोख कर निर्माण कार्यों को ढहाया गया। इसमें लाभ कौर तलवार के मकान का कुछ हिस्सा भी तालाब की भूमि में निकला है। करीब 2191 वर्ग मीटर भूमि पर नगर निगम ने कब्जा ले लिया है। भूमि पर नगर निगम की संपत्ति होने के बोर्ड भी लगा दिए हैं।
पूर्वाह्न करीब 11.15 बजे अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते के जयपाल सिंह पटेल टीम के साथ कैंट साइड की अक्षर विहार तालाब की कब्जे वाली भूमि पर पहुंचे। एसडीएम सदर विशु राजा और तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता भी लेखपालों की टीम के साथ आ गए। संयुक्त टीम ने फीता डालकर भूमि की नापजोख शुरू की।
इसी बीच अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) भी मौके पर आ गए। तालाब के पुराने नक्शे के अनुसार जलमग्न भूमि का रकबा पूरा करने के लिए चिन्हांकन शुरू किया गया। चूना डालकर निशान लगाए। इसके बाद नगर निगम के बुल्डोजर से कब्जे वाली भूमि में हुए अवैध निर्माण ढहाए। चहारदीवारी और तालाब किनारे बनाया शौचालय ढहाया। भूमि खरीदने वाले विरोध करते रहे और बुल्डोजर निर्माण ढहाता रहा।
इसके बाद टीम आवास-विकास कालोनी की तरफ बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने वाले अक्षर विहार तालाब से लगी कब्जे वाली भूमि की पैमाइश करने गई। लाभ कौर तलवार के मकान से नापजोख शुरू की गई। कुछ भूमि तालाब की निकलने के बाद प्रिंस छावड़ा द्वारा खरीदी गई भूमि की पैमाइश कर कब्जे वाली भूमि का चिन्हांकन किया गया।
प्रिंस छावड़ा के अधिवक्ता ने सिविल कोर्ट स्टे की कॉपी व अन्य कागजात दिखाए लेकिन एसडीएम सदर ने उन्हें दूर कर दिया। इसके बाद कब्जे वाली भूमि पर बने निर्माण को ढहाया गया। कार्रवाई के बाद करोड़ों रुपये में जमीन खरीदने वाले कई बिल्डरों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
