बरेली: स्कूल सिर्फ पढ़ाई के लिए होते हैं, मार्केटिंग के लिए नहीं… और प्रधानाध्यापिका निलंबित
अमृत विचार, बरेली। मिशन शक्ति के तहत एक दिन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाई गई अपर्णा सिंह ने चार्ज संभालते ही स्कूलों में छापेमारी शुरू कर दी। उन्होंने बिथरी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल नरियावल में नेटवर्क मार्केटिंग की क्लास चलने और निजी कंपनी के प्रोडक्ट बेचने पर प्रधानाध्यापिका पारूल चंद्रा को तत्काल प्रभाव से …
अमृत विचार, बरेली। मिशन शक्ति के तहत एक दिन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाई गई अपर्णा सिंह ने चार्ज संभालते ही स्कूलों में छापेमारी शुरू कर दी। उन्होंने बिथरी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल नरियावल में नेटवर्क मार्केटिंग की क्लास चलने और निजी कंपनी के प्रोडक्ट बेचने पर प्रधानाध्यापिका पारूल चंद्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए।
अपर्णा ने दसवीं की परीक्षा में जिले में आठवां स्थान हासिल किया था। गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे उन्होंने एक दिन के लिए बीएसए का चार्ज संभाला। कुछ देर कार्यालय में बिताने के बाद वह स्कूलों का निरीक्षण करने निकली। उनके साथ बीएसए विनय कुमार और कई विभागीय कर्मचारी भी थे।
वह सबसे पहले बिथरी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल नरियावल पहुंची। यहां उन्होंने देखा कि स्कूल के एक अंधेरे कमरे में सभी आठ शिक्षकों को बैठाकर दो लोग नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए पैसे कमाना सिखा रहे थे। साथ ही एक निजी कंपनी के प्रोडक्ट भी बेचे जा रहे थे। यह सब देख अपर्णा और बीएसए विनय कुमार दंग रहे गए। पूछने पर पता चला कि स्कूल की प्रधानाध्यापिका पारूल चंद्रा की अनुमति के बाद ही यह सब हो रहा है।
निरीक्षण में प्रधानाध्यापिका मौके पर भी नहीं मिली। वह रजिस्टर में हस्ताक्षर करने के बाद किसी कार्य के लिए स्कूल से बाहर गई हुई थी। इस पर अपर्णा ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित करने के आदेश दिए। बीएसए विनय कुमार का कहना है कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ एक बार ही बरेली आई थीं अपर्णा
एक दिन की बीएसए अपर्णा सिंह के पिता वीर सिंह किसान हैं। वह खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। वर्ष 2020 में अपर्णा ने 88.33 फीसदी अंकों के साथ रामनगर ब्लॉक के वसुंधरा हायर सेकेंड्री स्कूल सिरौली से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उनका स्कूल उनके गांव से आठ किलोमीटर दूर है। वह स्कूल के वाहन से आती-जाती हैं। अपर्णा बताती हैं, ‘गुरुवार को मैं दूसरी बार बरेली आई हूं। इससे पहले 21 जनवरी को जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट बुलाया था। तब पहली बार बरेली आई थी। मैं आईएएस अधिकारी बनना चाहती हूं। अब जब बीएसए की कुर्सी पर बैठी तो और ऊर्जा मिली है। अब मुझे आईएएस बनने से कोई नहीं रोक सकता।’
डीआईओएस बनी आकांक्षा बोली- स्कूलों में उपकरणों की है कमी
इसी मिशन के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) बनी आकाक्षा का कहना है कि वैसे तो माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई ठीक-ठाक है। स्कूलों में खेल का मैदान भी है मगर वहां खेलने के लिए उपकरण नहीं है जो होने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे स्कूलों में बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी नहीं दी जा रही है। आकांक्षा ने बताया कि वह आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती है। आकांक्षा ने फतेहगंज पश्चिमी के प्रशांत माध्यमिक विद्यालय से 10वीं की परीक्षा 88 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। वह सिरसा जागीर में रहती है। उन्होंने बताया कि उनके पिता शेर सिंह बरेली की ही एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं।
