बरेली: अब विषय का पहला प्रश्न पत्र होगा ऑब्जेक्टिव
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत जहां एक और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है तो परीक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। छात्रों को पाठ्यक्रम की पूरी जानकारी हो, इसके लिए परीक्षा में प्रत्येक विषय का पहला प्रश्नपत्र आब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) रखा जाएगा। शनिवार को विश्वविद्यालय स्तर …
बरेली, अमृत विचार। नई शिक्षा नीति के तहत जहां एक और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है तो परीक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। छात्रों को पाठ्यक्रम की पूरी जानकारी हो, इसके लिए परीक्षा में प्रत्येक विषय का पहला प्रश्नपत्र आब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) रखा जाएगा।
शनिवार को विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति की संस्तुतियों के अनुमोदन के संबंध में विषय पाठ्यक्रम समिति के संयोजकों की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा गया। संयोजकों ने इस प्रस्ताव को सहमति दे दी। इससे पहले विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति के प्रस्ताव को अब एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। इसके बाद ही लागू किया जाएगा।
विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन के प्रथम तल पर बने सभागार में परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार और प्रो. एसके पांडेय की मौजूदगी में विषय पाठ्यक्रम समितियों के संयोजकों की बैठक हुई। समितियों के 17 संयोजक हैं। बैठक के संबंध में सभी संयोजकों को 21 जनवरी को कुलपति ने निर्देश जारी किए थे। इसमें परीक्षा नियंत्रक ने नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षा व्यवस्था में सुधार के संबंध में प्रस्ताव रखा। इसमें प्रमुखता से स्नातक और परास्नातक के सभी विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर चर्चा की गई।
इसमें बताया गया कि प्रोफेशनल कोर्स को छोड़कर सभी पाठ्यक्रमों का पहला प्रश्न पत्र ऑब्जेक्टिव होगा। प्रश्नपत्र में आब्जेक्टिव प्रश्न पाठ्यक्रम के हिसाब से तैयार होंगे। इस तरह के प्रश्न पत्र तैयार करने से छात्रों की शिक्षा के स्तर में सुधार होगा क्योंकि इस प्रश्नपत्र में पास होने के लिए छात्रों को लगभग पूरा पाठ्यक्रम पढ़ना ही होगा। मौजूदा समय में कुछ छात्र पाठ्यक्रम से मुख्य भाग की पढ़ाई कर परीक्षा दे देते हैं। इस तरह के प्रश्नपत्र तैयार होने से छात्रों को भविष्य में नौकरी से संबंधित प्रश्नपत्रों को हल करने में भी आसानी होगी।
अभी पहले चरण में है प्रस्ताव
वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र तैयार करने का प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है। अभी इसे लागू करने में काफी समय लगेगा क्योंकि अभी इसे एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। शनिवार को हुई बैठक में अधिकांश संयोजक शामिल हुए। बताया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक में तीन वर्ष में अलग-अलग तरह से परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। प्रथम व द्वितीय वर्ष में पाठ्यक्रम को समराइज किया जाएगा। इसके अलावा परीक्षा का समय भी दो घंटे का होगा लेकिन अंतिम वर्ष में प्रथम व द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम को कवर करने के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र रखा जाएगा।
