बरेली: लापरवाही से बर्बाद हुईं कोरोना वैक्सीन की 279 डोज
अमृत विचार, बरेली। जिले में तीन बार हुए टीकाकरण में लापरवाही से कोरोना वैक्सीन की 279 डोज खराब हो गईं। शासन ने दस फीसद तो वेस्टेज पहले से ही तय रखा है। कोरोना को मात देने के लिए भारत में निर्मित कोरोना की दोनों वैक्सीन की आपूर्ति जिले में हो चुकी है। यहां वर्तमान में …
अमृत विचार, बरेली। जिले में तीन बार हुए टीकाकरण में लापरवाही से कोरोना वैक्सीन की 279 डोज खराब हो गईं। शासन ने दस फीसद तो वेस्टेज पहले से ही तय रखा है।
कोरोना को मात देने के लिए भारत में निर्मित कोरोना की दोनों वैक्सीन की आपूर्ति जिले में हो चुकी है। यहां वर्तमान में सीरम इंस्टीट्यूट आफ पुणे में निर्मित कोविशिल्ड स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जा रही है। कोविशिल्ड की एक वायल में दस डोज होती हैं।
ऐसे में वैक्सीनेशन से पहले वैक्सीनेटरों को प्रशिक्षण के दौरान निर्देशित किया गया था कि वैक्सीनेशन के लिए दस लोग आने के बाद ही वायल का प्रयोग करें जिससे वैक्सीन को सुरक्षित कर सकें। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. आरएन सिंह ने बताया कि शासन की ओर से 35550 कोरोना वैक्सीन की वायल भेजी थी। इसमें से दस प्रतिशत वेस्टेज निर्धारित होता है। ऐसे में केंद्रों की ओर से वैक्सीन खराब होने पर दूसरे चरण में वैक्सीन की कमी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भरपूर सतर्कता के बावजूद केंद्रों की लापरवाही से 279 डोज खराब हो गई है। 16 जनवरी को पहले चरण में कई बूथों पर नई वायल तो खुल गई लेकिन लगवाने वालों की संख्या अधिक न होने से बची डोज को नष्ट करना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार रखरखाव में तापमान में बदलाव से वैक्सीन खराब होती है लेकिन यहां कोल्ड चेन पूरी सतर्कता से मेंटेन की जा रही है। आइस पैक में 2-8 डिग्री के बीच का तापमान मेंटेन किया जा रहा है।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि वैक्सीन लगाने के लिए प्रयोग की जा रही सिरिंज एक बार में .5 मिलीलीटर दवा निकालती है लेकिन आटोमेटिक सिरिंज कई बार .2 या .3 मिली निकालकर ही लाक हो जाती है। इस डोज को भी प्रयोग न कर नष्ट कर दिया जाता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. आरएन सिंह ने बताया कि .5 मिली की पहली डोज लेने के बाद 28वें दिन दोबारा इतनी ही मात्रा में वैक्सीन दी जाएगी। इसके दस दिन पहले यानि टीके के 42 दिन बाद पर्याप्त एंटीबाडी टाइटर बनेंगे।
ये एंटीबाडी छह माह तक मजबूत रहेगी और धीरे-धीरे कम होने के बावजूद सालभर तक संक्रमण से बचाव में सक्षम होगी। एक बार वॉयल खुलने के बाद उस वैक्सीन को 4 घंटे के भीतर उपयोग करना होता है। ऐसे में पर्याप्त उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण डोज खराब हो रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, टीका देने वालों को उन लोगों को बुलाने की अनुमति दी गई है जिन्हें तय दिन पर वैक्सीन नहीं लगाई जानी थी। यह फैसला संकोच की वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए किया गया था। हालांकि, 16 जनवरी के बाद 22 जनवरी को 123 व 28 जनवरी को 125 वैक्सीन खराब हो गईं।
वैक्सीनेशन से पहले सभी केंद्रों के नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान बताया गया था कि दस लाभार्थी के बाद ही बॉयल खोल के प्रयोग की जाई। केंद्रों पर निर्देश के बाद लापरवाही से 279 वैक्सीन खराब हो गई है।
-डा. आरएन सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
