बरेली: 30 जून तक परीक्षाएं कराकर रिजल्ट जारी करना चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। शासन ने एक दिन पहले विश्वविद्यालयों में सत्र 2020-21 की प्रयोगात्मक परीक्षाओं को आयोजित करने का प्रस्तावित शिड्यूल जारी किया है। प्रस्तावित शिड्यूल में परीक्षाएं कराना रुहेलखंड विश्वविद्यालय के लिए बड़ी चुनौती होगा। साथ ही छात्रों का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो सकेगा। विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाएं करीब 45 दिन में पूरी हो …

अमृत विचार, बरेली। शासन ने एक दिन पहले विश्वविद्यालयों में सत्र 2020-21 की प्रयोगात्मक परीक्षाओं को आयोजित करने का प्रस्तावित शिड्यूल जारी किया है। प्रस्तावित शिड्यूल में परीक्षाएं कराना रुहेलखंड विश्वविद्यालय के लिए बड़ी चुनौती होगा। साथ ही छात्रों का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो सकेगा।

विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाएं करीब 45 दिन में पूरी हो पाती हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय को मई यानी एक महीने में परीक्षा करानी होंगी। ऐसे में परीक्षाएं पूरी कराके 30 जून तक परिणाम जारी करना भी आसान नहीं होगा। शासन का निर्देश मिलते ही विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इसपर मंथन शुरू कर दिया है।

कोरोना की वजह सबसे पहले सत्र 2019-20 की सभी परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं। उसके बाद सत्र 2020-21 का शिड्यूल गड़बड़ा गया। नवंबर के अंत सप्ताह से 50 फीसदी छात्रों के नियमों से पढ़ाई शुरू तो हो गई लेकिन पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो सका। इसके बाद दिसंबर में फिर से अलग-अलग पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं शुरू हो गईं।

सबसे पहले एलएलबी की परीक्षाएं हुईं। उसके बाद छूटी हुई प्रयोगात्मक परीक्षाएं और फिर इंप्रूवमेंट परीक्षाएं। 29 जनवरी को ही परीक्षाएं समाप्त हुईं और अब शासन ने फरवरी माह में विषम सेमेस्टर की प्रयोगात्तमक परीक्षाएं कराने का शिड्यूल जारी कर दिया है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई का शिड्यूल गड़बड़ा जाएगा।

क्योंकि मार्च में विषम सेमेस्टर की लिखित परीक्षाएं होंगी। सिर्फ मार्च के महीने में सम सेमेस्टर की कक्षाएं संचालित हो सकेंगी। उनमें भी होली समेत अन्य छुट्टियां भी होंगी। मार्च के बाद फिर से परीक्षाएं शुरू करानी होंगी। अप्रैल महीने में सम सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं पूरी करानी होंगी।

शासन का निर्देश है कि मई माह में वार्षिक व सम सेमेस्टर की लिखित परीक्षाएं आयोजित करायी जाएं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय एक महीने में परीक्षाएं आयोजित नहीं करा पाएगा तो उसे जून महीने तक परीक्षाओं का शिड्यूल जारी करना होगा। यदि 15 जून तक परीक्षाएं आयोजित हुईं तो 15 दिनों में परिणाम जारी करना भी आसान नहीं होगा। यदि नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षा सुधार के तहत लागू किए गए प्रस्ताव के तहत परीक्षाएं करायी गईं तो फिर छात्रों को भी दिक्कत होगी, क्योंकि उनका पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ होगा। इससे उनके परिणाम पर भी असर पड़ सकता है।

विश्वविद्यालय में बिना तारीख बढ़े नहीं पूरी होती प्रक्रिया:

विश्वविद्यालय में कोई भी प्रक्रिया बिना तारीख बढ़ाए पूरी ही नहीं हो रही है। चाहें प्रवेश हो या फिर परीक्षा या मूल्यांकन को चुनौती देने की प्रक्रिया सभी का एक बार शिड्यूल जारी करने के बाद बढ़ाया ही जाता है। यहां तक की परीक्षा का शिड्यूल जारी करने के बाद उनमें संसोधन भी किया जाता है।

कुछ दिनों पहले ही विश्वविद्यालय ने चैलेंज मूल्यांकन के द्वितीय चरण के आवेदन की तिथि 10 फरवरी तक बढ़ाई है। हर बार में छात्रों के हित का हवाला विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दिया जाता है, जबकि कई बार असली वजह कुछ और ही होती है। जहां आवेदन फार्मों की बात हो तो इसके जो छात्र छूट जाते हैं, उन्हें तो मौका मिल जाता है लेकिन अधिक आवेदन आने से विश्वविद्यालय को राजस्व भी बढ़ता है।

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