राज्यसभा में जब दिग्विजय ने सिंधिया से कहा, ‘वाह जी महाराज, वाह!’
नई दिल्ली। राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक-दूसरे पर मीठी चुटकी ली और जब दिग्विजय सिंह ने सिंधिया से कहा, ‘वाह जी महाराज, वाह!’, तो पूरे सदन ने खूब आनंद लिया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में …
नई दिल्ली। राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक-दूसरे पर मीठी चुटकी ली और जब दिग्विजय सिंह ने सिंधिया से कहा, ‘वाह जी महाराज, वाह!’, तो पूरे सदन ने खूब आनंद लिया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सिंधिया ने तीन नये कृषि कानूनों के विरोध को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। बाद में चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सिंधिया पर चुटकी लेते हुए कहा, ”सिंधिया जी को मैं बधाई देता हूं। जितने अच्छे ढंग से वह संप्रग सरकार के दौरान सरकार का पक्ष रखा करते थे, उतने ही अच्छे ढंग से उन्होंने आज भाजपा का पक्ष रखा।”
सिंधिया को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, ”…वाह जी महाराज, वाह…वाह जी महाराज, वाह!” इसके जवाब में सिंधिया ने अपनी सीट से ही कहा, ”सब आपका अशीर्वाद है।” दिग्विजय सिंह ने तत्काल जवाब दिया कि उनका आशीर्वाद हमेशा सिंधिया के साथ रहेगा। उन्होंने कहा, ”आप जिस पार्टी में रहे… मेरा अशीर्वाद था, है और रहेगा।”
इससे पहले सिंधिया ने अपने संबोधन के क्रम में कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि पार्टी ने 2019 में अपने चुनावी घोषणा पत्र में कृषि सुधारों का वायदा किया था। इसके अलावा राकांपा नेता और तत्कालीन संप्रग सरकार में कृषि मंत्री शरद पवार ने 2010-11 में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनिवार्य बनाने संबंधी बात की थी।
सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ”जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी। चित्त भी मेरी, पट भी मेरी..देश के साथ खिलवाड़ कब तक चलेगा। जो कहें, उस पर अडिग रहें।” सिंधिया के तत्काल बाद जब राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने दिग्विजय सिंह का नाम पुकारा, तब भी सदन में ठहाके गूंज उठे।
इस पर नायडू ने कहा, ”मैंने कुछ परिवर्तन नहीं किया है। सूची में जो नाम आया उसके हिसाब से मैंने बुलाया।” ज्ञात हो कि सिंधिया ने पिछले साल कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। उनके साथ उस समय कांग्रेस के कई विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए। परिणामस्वरूप कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार गिर गई और शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के नये मुखिया बने।
