बरेली: राशन माफिया का गजब नेटवर्क, आज तक किसी पर नहीं हुई कार्रवाई

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। राशन की कालाबाजारी का खेल बहुत पुराना है। सत्ता किसी की भी रही हो लेकिन कालाबाजारी आज तक नहीं रुकी। इस खेल से जुड़े लोगों को हर सरकार में संरक्षण देने वाला कोई न कोई मिल ही जाता है। इसके पीछे बड़ा नेटवर्क है जो इस अवैध धंधे में लिप्त हैं। गरीबों …

अमृत विचार, बरेली। राशन की कालाबाजारी का खेल बहुत पुराना है। सत्ता किसी की भी रही हो लेकिन कालाबाजारी आज तक नहीं रुकी। इस खेल से जुड़े लोगों को हर सरकार में संरक्षण देने वाला कोई न कोई मिल ही जाता है। इसके पीछे बड़ा नेटवर्क है जो इस अवैध धंधे में लिप्त हैं। गरीबों के राशन पर डाका डालने के खेल में आपूर्ति विभाग के अधिकारी और नेता राशन डीलरों के साथ मिलकर राशन माफिया को संरक्षण देते हैं।

केंद्र में मोदी और यूपी में योगी सरकार बनने के बाद लोगों को ऐसा लग रहा था कि कोई भी भ्रष्टाचारी अब बच नहीं पाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से निर्देश भी जारी हुए। बावजूद इसके जिले में कई स्थानों पर आज भी राशन माफिया की तूती बोल रही है। शिकायतें होतीं है पर उन्हें दबा दिया जाता है।

केंद्र और राज्य सरकार गरीब लोगों को सस्ता राशन देने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रही है पर राशन माफिया के आगे सभी व्यवस्थाएं फेल हैं। हर सरकार में अपनी पैठ बनाकर गरीबों के हक पर डाका डालने वाले राशन माफिया की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वे अपने आगे किसी को टिकने नहीं देते।

वजह है कि महकमे के कुछ कर्मचारियों से मिलकर वह अपना काम सीधा करा लेते हैं। माधोबाड़ी से एक गोदाम में पकड़े गए 450 बोरी सरकारी चावल पकड़ने के मामले में अभी तक खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी यह पता नहीं लगा सके हैं कि पकड़ा हुआ सरकारी चावल प्राइवेट गोदाम में कैसे पहुंचा।

चने की घटतौली मामले की फाइल डीएम कार्यालय ही नहीं पहुंची
सरकार की ओर से कोरोना काल में गरीबों के लिए भेजे जा रहे मुफ्त चने पर भी माफिया हावी रहा। 20 अक्टूबर 2020 को उच्च गुणवत्ता के चने को दूसरी जगह बेचकर गरीबों को कंकड़ मिला चना सरकारी मोहर लगे दूसरे बोरों में भरा जा रहा था। इसे लेकर डेलापीर मंडी में हंगामा हुआ। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। इसी बीच गोदाम प्रभारी फरार हो गया। हंगामे के बाद कोटेदार फिर से धरने पर बैठ गए। कोटेदारों ने बताया कि शिकायत के बाद अधिकारियों ने घपलेबाजी करने वाले अधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने का आश्वासन दिया था मगर डीएम कार्यालय में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भेजी गई फाइल का भी आज तक पता नहीं लगा है।

बभिया क्षेत्र में भी पकड़ा गया था सरकारी राशन
पिछले साल 1 जून को कैंट क्षेत्र के बभिया चौकी इंचार्ज प्रवीण बेनीवाल ने क्यारा गांव से एक ट्रॉली पर सरकारी चावल पकड़ा था। ट्राली चालक ने बताया कि क्यारा के कोटेदार के नजदीकी मुनीश गुप्ता ने 40 बोरे चावल फरीदपुर के एक व्यापारी को बेचने के लिए भेजा था। जिस पर चौकी इंचार्ज प्रवीण बेनीवाल ने जिला पूर्ति विभाग को सूचना दी तो पूर्ति निरीक्षक वहां पहुंचे थे मगर अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

गोदाम से लेकर दुकान तक फैला जाल
राशन की कालाबाजारी गोदाम से ही शुरू हो जाती है। यहां सेटिंग के तहत पहले ही राशन डीलरों को कम राशन दिया जाता है। बचा राशन माफिया को बेच दिया जाता है। जहां सख्ती और जांच का अंदेशा होता है वहां के राशन डीलर को पूरा माल दिया जाता है। बाद में राशन डीलर के यहां राशन को बांटने में होने वाले खेल के बाद माफिया के हाथों बेच दिया जाता है।

माधोबाड़ी के गोदाम में सरकारी चावल कैसे पहुंचा इसकी जानकारी नहीं है। दुकान और गोदाम का स्टाक जांच में सही पाया गया है। अब पुलिस की विवेचना में ही कुछ हासिल होगा। डेलापीर मंडी वाले प्रकरण में फाइल भेजने की जानकारी का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। -धर्मेन्द्र सिंह, एआरओ

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