बदायूं: किसान ने तहसील में खाया विषैला पदार्थ, हुई मौत

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अमृत विचार, सहसवान। असंक्रमणीय भूमिधर से संक्रमणीय भूमिधर घोषित कराए जाने के लिए उपजिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे किसान ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया और तहसील में आकर बेसुध हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से बरेली रैफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवार …

अमृत विचार, सहसवान। असंक्रमणीय भूमिधर से संक्रमणीय भूमिधर घोषित कराए जाने के लिए उपजिलाधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे किसान ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया और तहसील में आकर बेसुध हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से बरेली रैफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई।

परिवार वाले एसडीएम पर अभद्रता का आरोप लगा रहे हैं। वहीं उपजिलाधिकारी ने बताया कि उक्त किसान दबाव डाल रहा था। उन्होंने किसी भी तरह की अभद्रता से इंकार किया है| किसान की मौत से अधिकारियों में खलबली मच गई है। तहसील क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर टप्पा मलसई उर्फ़ रसूलपुर निवासी बीएसपी के पूर्व विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष हरवीर सिंह व उसके दो भाइयों के नाम जमीन का पट्‌टा है।

उसने तहसील में असंक्रमणीय भूमिधर से संक्रमणीय भूमिधर घोषित कराए जाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। वह शनिवार को उपजिलाधिकारी किशोर गुप्ता से मिला और पत्रावली स्वीकृत करने का अनुरोध किया। एसडीएम ने हरवीर से पत्रावली ले ली और सोमवार को आने को कहा। हरवीर ने बार-बार के चक्कर पर एतराज जताया तो एसडीएम से कुछ कहासुनी हो गई।

इसके बाद वह नगर के मोहल्ला सैफुल्लागंज में अपने घर पहुंचा और पत्नी ममता व अन्य लोगों को विषैला पदार्थ खाने की कहकर बाइक से तहसील पहुंचकर बरामदे में गिरकर चीखने-चिल्लाने लगा। उसकी हालत बिगड़ती देख जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया| हालत में सुधार न होने पर बरेली रैफर कर दिया गया।

एंबुलेंस से ले जाते समय खेड़ा नवादा के पास उसकी मौत हो गई। हरवीर की पत्नी ममता ने बताया कि उसका पति कई दिनों से तहसील के चक्कर लगा रहा था। तहसील के कर्मचारियों ने पैसे भी ले लिए फिर भी काम नहीं हुआ। एसडीएम ने अभद्रता कर दी जिससे उसके पति ने आहत होकर विषैला पदार्थ खा लिया। भाई जयवीर ने भी हरवीर के परेशान होने की बात कही।

उपजिलाधिकारी, सहसवान किशोर गुप्ता ने कहा कि वह हरवीर नाम के किसी भी व्यक्ति को नहीं जानते। रजिस्ट्रार कार्यालय से असंक्रमणीय भूमिधर से संक्रमणीय भूमिधर घोषित कराये जाने के लिए एक पत्रावली आयी थी| पीछे से एक व्यक्ति कार्यालय में आया और पत्रावली पर हस्ताक्षर करने के लिए दवाब डालने लगा। उन्होंने कहा कि पत्रावली समय मिलते ही स्वीकृत कर दी जाएगी परन्तु वह व्यक्ति नहीं मान रहा था। अभद्रता जैसा कुछ नहीं हुआ। उसके परिवार द्वारा लगाए आरोप बेबुनियाद हैं|

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