बरेली: शहर में डायवर्जन की सूचना नहीं देती ट्रैफिक पुलिस, जाम में फंसकर समय हो रहा बर्बाद

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। बरेली स्मार्ट सिटी में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन जो साधन हैं उनमें ही सूचना देने में ट्रैफिक पुलिस स्मार्ट नहीं है। लोगों को ट्रैफिक डायवर्जन की सूचना देने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट तो खोले गए हैं लेकिन इनका सही से इस्तेमाल ही नहीं किया …

अमृत विचार, बरेली। बरेली स्मार्ट सिटी में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन जो साधन हैं उनमें ही सूचना देने में ट्रैफिक पुलिस स्मार्ट नहीं है। लोगों को ट्रैफिक डायवर्जन की सूचना देने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट तो खोले गए हैं लेकिन इनका सही से इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है।

डायवर्जन की सूचना भी देरी से दी जाती है तो आधी-अधूरी। लोगों को बता दिया जाता है कि वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें लेकिन ये मार्ग कौन से हैं, इसकी जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में लोगों को अपना समय तो जाम में फंसकर बर्बाद करना पड़ता है। ईंधन के अधिक खर्च की मार भी पड़ रही है।

शहर में चौपुला चौराहे पर 75 दिन के डायवर्जन की सूचना तो पुलिस द्वारा जारी की गई थी लेकिन उसके बाद बरेली कॉलेज से पटेल चौक, चौकी चौराहे से दामोदर पार्क, चौकी चौराहे से गांधी उद्यान और गांधी उद्यान से बियावानी कोठी तक सीवर लाइन की खुदाई की वजह से रास्ता बंद करने व डायवर्जन की सूचना नहीं दी गई।

गांधी उद्यान से कैंट होते हुए बियावानी कोठी तक रूट डायवर्जन की सूचना तीन दिन बाद सूचना विभाग द्वारा जारी की गई। यह सूचना भी आधी-अधूरी दी गई। इसमें लिखा गया कि गांधी उद्यान से बियावानी कोठी चौराहे तक 3 फरवरी से 10 दिनों तक सेटेलाइट की ओर जाने वाले यातायात का डायवर्जन किया गया है। यह डायवर्जन कहां से किया गया है, डायवर्जन होने पर लोग किस रास्ते से जाएंगे, इसकी कोई भी सूचना नहीं दी गई।

फेसबुक और टि्वटर अकाउंट सिर्फ नाम के
पांच साल पहले बरेली ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए थे जिसमें टि्वटर व फेसबुक अकाउंट दोनों शामिल हैं। इससे पहले भी फेसबुक अकाउंट बनाए गए थे जिन्हें बंद कर दिया गया। इन अकाउंट को खोलने का प्रमुख मकसद था कि इन पर ट्रैफिक की पल-पल की जानकारी शहरवासियों को दी जा सके।

इसके लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए गए थे। कुछ दिनों बाद स्मार्टफोन में खराबी आने लगी तो रिचार्ज की समस्या की वजह से ढिलाई बरती जाने लगी। उसके बाद पुलिसकर्मियों को अपने ही स्मार्टफोन से अपडेट डालने के निर्देश दिए गए लेकिन कभी भी लोगों को समय पर ट्रैफिक की सूचना नहीं मिल सकी।

ट्रैफिक समस्या संबंधी पोस्ट 10 दिन पहले 25 जनवरी को की गई थी। सिटी सब्जी मंडी चौराहे पर यातायात सामान्य होने की जानकारी दी गई थी। इससे पहले की बात करें तो 23 जनवरी को पटेल चौक पर खुदाई के कार्य की जानकारी दी गई थी और लोगों को वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करने की सलाह दी गई थी लेकिन मार्गों की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

टूटी-फूटी सड़क खुली तो यहां भी लगा दी जेसीबी
सेटेलाइट से श्यामगंज तक सीवर लाइन पड़ने के बाद रास्ते को पत्थर डालकर शुरू कर दिया गया। आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे तक तो रास्ता काफी खराब पड़ा है। श्यामगंज से बरेली कॉलेज तक भी सीवर लाइन पड़ गई है। रास्ते पर पत्थर व बजरी भी डाल दी गई है।

रास्ता भी लोगों के आने के लिए खोल दिया। रविवार को ही अचानक जेसीबी लगाकर सीवर लाइन का काम शुरू कर दिया गया। काम शुरू तो कर दिया गया लेकिन दोनों तरफ न तो रास्ता बंद किया और न ही कोई डायवर्जन किया गया। ऐसे में लोग जेसीबी के पास से ही सड़क किनारे से गुजरने लगे। इसकी वजह से दोनों तरफ काफी देर तक वाहन जाम में फंसते रहे। ऑटो, ई-रिक्शा व बाइक सवार तो गलियों से लंबा चक्कर लगाकर निकल गए लेकिन कार सवारों को वापस ही लौटना पड़ा।

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