अमेठी: धरती का पेट भरने के लिए जल संरक्षण जरूरी- डॉ. अर्जुन पांडेय
अमेठी। राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर “कैच द रेन परियोजना” के तहत नेहरू युवा केन्द्र के तत्वावधान में जल सोत्रों व जल संरक्षण के विविध आयाम विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विकास खण्ड तिलोई, संग्रामपुर, मुसाफिरखाना, शुकुल बाजार के 500 राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों, युवा मण्डल …
अमेठी। राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर “कैच द रेन परियोजना” के तहत नेहरू युवा केन्द्र के तत्वावधान में जल सोत्रों व जल संरक्षण के विविध आयाम विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विकास खण्ड तिलोई, संग्रामपुर, मुसाफिरखाना, शुकुल बाजार के 500 राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों, युवा मण्डल अध्यक्षों ने प्रतिभागिता की। मुख्य अतिथि के रूप में अमेठी जल बिरादरी के संयोजक डाॅ. अर्जुन पांडेय ने जल स्रोतों एवं उसके विविध आयामों को लेकर व्यापक चर्चा की।
मुख्य अतिथि पर्यावरणविद डॉ. पांडेय ने कहा कि भूमिगत जल के घटते स्रोतों को बरकरार रखने की पहल, मानसूनी बारिस को संरक्षित, संचय करने और उसे रिचार्ज करने की कोशिश हमारा मकसद होना चाहिए। जल है तो कल है। कल के लिए जल आज बचाना होगा। इसे लोगों को समझने की जरूरत है। वर्षा जल संचयन एवं उसके उपयोग के बीच संतुलन होना जरूरी है जल कल आधारित संस्कृति है। गिनाने के लिए कुएं, तालाब, पोखरें, झील, झरने, नदियां बहुत हैं फिर भी वे खाली हैं। धरती का पेट भरने के लिए जल स्त्रोतों का संयोजन जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजशास्त्री डा. धनन्जय सिंह ने कहा कि वर्षा के जल को धरती के पेट में डालना तथा जल को सोंच समझकर उपयोग करना जरूरी है। जल का उपयोग भावी पीढ़ी को ध्यान में रखकर करना होगा ताकि गंभीर जल संकट से बचा जा सके।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए डा. आराधना राज ने कहा कि जल ही जीवन है। जल के बिना जीव- जन्तुओं एवं वनस्पतियों का जीवन सम्भव नहीं है।
