बरेली: डेलापीर तालाब की भूमि से जुड़े कई कागजात गायब, खोजबीन शुरू

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। अवैध रूप से तत्कालीन नगर पालिका द्वारा बेची गई डेलापीर तालाब की भूमि वापस लेने की कार्रवाई कराने के लिए अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने भूमि से संबंधित अभिलेखों को राजस्व विभाग से तलब किया है। लेकिन इससे जुड़े कुछ अहम दस्तावेज गायब बताए जा रहे हैं। अभी तक कागजात …

अमृत विचार, बरेली। अवैध रूप से तत्कालीन नगर पालिका द्वारा बेची गई डेलापीर तालाब की भूमि वापस लेने की कार्रवाई कराने के लिए अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने भूमि से संबंधित अभिलेखों को राजस्व विभाग से तलब किया है। लेकिन इससे जुड़े कुछ अहम दस्तावेज गायब बताए जा रहे हैं। अभी तक कागजात ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं।

1955 में डेलापीर तालाब के बैनामे को चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। म्यूनिसिपल बोर्ड ने विकसित करने के लिए रामभरोसे लाल ट्रस्ट को जो भूमि बेची थी, उस पर कब्जा नहीं लिया गया है। इसके कारण कुछ समय बाद दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया। मामला तब फंसा, जब तालाब का वजूद समाप्त करते भूमि को अपने कब्जे में करने का खेल शुरू हो गया। प्रकरण की जांच के लिए बनाई गई कमेटी को पुराने कागजात तलाशने में दिक्कतें भी आ रही हैं।

शुक्रवार को नगर निगम के राजस्व विभाग में पुराने अभिलेखों की तलाश में कर्मचारी जुटे रहे। जिन हिस्सों पर भवन का निर्माण हो गया है, उसके कागजात और मानचित्र को उपलब्ध कराने के लिए बीडीए से भी संपर्क साधा जा रहा है। अभी तक जो बातें सामने आई हैं, इसमें 23 दिसंबर 1955 में अवध बिहारीलाल ने नीलामी प्रकिया के दौरान भूखंड संख्या 143 का बैनामा कराया था। यह रजिस्ट्री नगरपालिका ने अवैध रूप से की थी। 1359 फसली के खसरा के अनुसार बिहारमान नगला गांव की भूमि में तालाब है।

अवध बिहारीलाल ने भूमि को उपहार स्वरूप अपनी मां जानकी देवी जूनियर हाईस्कूल फतेहगंज पश्चिमी के पक्ष में 12 जून 1964 में कर दिया। बाद में चलकर जानकी देवी जूनियर हाईस्कूल द्वारा आकाश इंफ्रा हाईट्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में 18 जून 2012 बेच दिया गया है। जबकि राम भरोसे लाल ट्रस्ट 2012 में तालाब की जमीन का बैनामा करना चाहते थे। नगर निगम कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि नगर निगम अपनी भूमि को किस तरह वापस लेता है। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है। भूमि संबंधी सभी अभिलेखों को तलब किया है।

नगर निगम को नहीं तालाब व जंगल बेचने का हक नहीं
डा. प्रदीप कुमार ने डेलापीर तालाब की जमीन का मूल्य लौटा कर वापस लेने के मंडलायुक्त के आदेश का स्वागत किया है। नगर पालिका (अब नगर निगम) को इस तालाब को बेचने का कोई अधिकार ही नहीं है। पिछले साल अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में भी उन्होंने यही कहा था।

नदी, तालाब, जंगल आदि का मालिक नगर निगम नहीं। वह सिर्फ ट्रस्टी होता है, उसे ये अधिकार नहीं कि वह इन्हें प्राइवेट स्वामित्व की वस्तु बना दे। ये तो सार्वजनिक उपयोग की वस्तुएं हैं। इन पर किसी एक का हक नहीं हो सकता है। हमारी विधि व्यवस्था जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था पर आधारित है। ये सिद्धान्त उसका भाग है।

इंग्लैंड में 1215 में जनता को अधिकार देने का पहला दस्तावेज मैग्ना कार्टा का में भी शामिल था। उससे पहले ये रोमन कानून का भी हिस्सा था। उपरोक्त बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल में 2019 में सपोर्ट इंडिया वेलफेयर सोसायटी केस में कही थीं। यह केस आगरा में एक तालाब पर कब्जे के सम्बन्ध में था। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में यही मत व्यक्त किया है।

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