बरेली: अब भेड़-बकरी को भी लगेगा खुरपका और मुंहपका का टीका
अमृत विचार, बरेली। पशुओं में होने वाली भयंकर बीमारी खुरपका और मुंहपका के प्रकोप से बचाने के लिए जिले के पशुओं का टीकाकरण मार्च में शुरू होगा। 45 दिन तक चलने वाले इस अभियान में खास बात ये है कि पहली बार छोटे पशुओं को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। जिसमें बकरी, भेड़ …
अमृत विचार, बरेली। पशुओं में होने वाली भयंकर बीमारी खुरपका और मुंहपका के प्रकोप से बचाने के लिए जिले के पशुओं का टीकाकरण मार्च में शुरू होगा। 45 दिन तक चलने वाले इस अभियान में खास बात ये है कि पहली बार छोटे पशुओं को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। जिसमें बकरी, भेड़ और सुअर भी हैं।
इस तरह से जिले में 9.78 लाख पशुओं का टीकाकरण होगा, जिसमें 8.40 लाख महिषवंशी और गोवंशी शामिल हैं। जिले में हाल के कुछ वर्षों से खुरपका और मुंहपका बीमारी का ज्यादा प्रकोप नहीं हुआ है। इसके बाद भी एहतियातन टीकाकरण कार्यक्रम हो रहा है। इसी क्रम में एनएडीसीपी यानी नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत गोवंश और महीष वंश की तरह भेड़-बकरी और सुअर को खुरपका-मुंहपका के टीके लगाए जाएंगे।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ललित कुमार वर्मा ने बताया दो खुर वाले पशुओं में खुरपका और मुंहपका बीमारी होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए प्रदेश में पहली बार बकरी, भेंड़ और सुअर को भी एफएमडी (फुट माउथ डिसीज यानी खुरपका मुंहपका) का टीका लगाया जाएगा, जिससे उनको भी इसके प्रकोप से बचाया जा सके। अब तक केवल गाय और भैंस को ही इसका टीका लगाया जाता रहा है।
प्रदेश सरकार ने मार्च से अप्रैल के बीच इस अभियान का पूरा कराने की तैयारी की है। ब्लाक स्तर पर तैयारियां शुरू हो रही हैं। पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव में पशुपालकों के बीच जागरूकता बढ़ाकर टीकाकरण पूरा कराएंगे। जल्द ही वैक्सीन सभी जिलों में पहुंचने का दावा पशुपालन विभाग ने किया है।
1.38 लाख है भेड़ व बकरी की संख्या
बरेली में भेड़ और बकरी की संख्या 1.38 लाख है। इनके कान में डालने के लिए छल्ला आपूर्ति की जिम्मेदारी नोएडा की कंपनी को सरकार ने दी है। ब्लाक के पशु अस्पताल में ग्राम वार भेड़ और बकरी का रजिस्टर बनाया जाएगा। ईयर टैगिंग के बाद भेड़ -बकरी के टीकाकरण का रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
ऑनलाइन रिकार्ड होने पर मिलेगी बीमा की सुविधा
सीवीओ के मुताबिक भेड़, बकरी और सुबर का रिकॉर्ड एनडीसीपी के पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। भेड़-बकरी की उम्र और पालने वाले का नाम और पता भी ऑनलाइन रहेगा। साथ ही इनके बीमा की सुविधा भी मिल सकेगी। गोवंश और महिष वंशीय पशुओं को आधार नंबर देने की मुहिम अंतिम चरण में है। ऐसे में इसमें भेड़-बकरी और सुबर को भी शामिल कर पशुपालकों को बड़ी राहत दी गई है।
क्या है 10 अंकों का आधार नंबर
एनएडीसीपी यानी नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत पशुपालन विभाग की ओर से भेड़-बकरियों की ईयर टैगिंग का कार्य शुरू किया जाना है। इसके पहले सभी भेड़-बकरियों का एक 10 अंकों का आधार नंबर दिया जाएगा, जो हर भेड़ और बकरी को अलग पहचान देगा। सभी भेड़-बकरी अपना आधार नंबर का एक छल्ला कान में पहनेंगी।
