रामपुर: दानिश खान ने कहा- शबनम की फांसी के लिए महिला जल्लाद की हो नियुक्ति
रामपुर। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने शबनम को फांसी पर चढ़ाने के लिए एक महिला जल्लाद की नियुक्ति की मांग की है। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने ट्वीटर के माध्यम से कहा कि शबमन को महिला जल्लाद द्वारा फांसी देने उचित होगा। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी। देश में …
रामपुर। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने शबनम को फांसी पर चढ़ाने के लिए एक महिला जल्लाद की नियुक्ति की मांग की है। आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने ट्वीटर के माध्यम से कहा कि शबमन को महिला जल्लाद द्वारा फांसी देने उचित होगा। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जाएगी। देश में जल्लादों की कमी है। बावनखेड़ी नरसंहार शबनम को फांसी देने के लिए महिला जल्लाद की नियुक्ति अतिआवश्यक है। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद शबनम को फांसी देंगे जोकि उचित नहीं है। बता दें कि शबनम वर्ष 2019 से रामपुर जिला कारागार की बैरक नंबर 14 में बंद है।
भारत के इतिहास में पहली बार एक महिला को फाँसी दी जानी है, देश में जल्लादों की कमी है। बावनखेड़ी नरसंहार शबनम को फाँसी देने के लिए महिला जल्लाद की नियुक्ति अतिआवश्यक है। पुरुष द्वारा एक महिला को फाँसी देना उचित नहीं है। @rashtrapatibhvn @PMOIndia @India_NHRC @myogiadityanath
— danish khan (@danishkhanrti) February 18, 2021
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शबनम ने की थी 7 लोगों की हत्या
अमरोहा जिले के बाबनखेड़ी गांव में 14-15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के 7 लोगों की हत्या करने वाली शबनम ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास दया याचिका भेजी है। शबनम को उम्मीद है कि शायद उसे इस बार माफी मिल जाए। हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास से दया याचिका खारिज हो चुकी है लेकिन इस जघन्य हत्याकांड के दोषी शबनम और सलीम के पास अभी भी विकल्प मौजूद हैं।
इस केस में अमरोहा की जिला अदालत ने 2010 में दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा दी थी। 2015 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां भी लोअर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से भी 11 अगस्त 2016 को शबनम की दया याचिका को ठुकरा दिया गया था।
राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी याचिका
साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट से शबनम की फांसी की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई थी। शबनम वर्ष 2019 से रामपुर जिला कारागार की बैरक नंबर 14 में बंद है और अपनी फांसी की सजा का इंतजार कर रही है। अब शबनम से राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास अपनी याचिका भिजवाई है तो वहीं उसके बेटे ने भी राष्ट्रपति से मां के लिए दया की गुहार लगाई है। शबनम का बेटा नाबालिग है और मां से मिलने जेल जाता रहता है। रामपुर जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बताया कि शबनम के दो अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को रामपुर जिला कारागार आए थे। वह दोबारा दया याचिका तैयार करके लाए थे, जिस पर शबनम के हस्ताक्षर कराए जाने के बाद उनको राज्यपाल को भेज दिया गया है।
राज्यपाल के पास दया याचिका भेजने का विकल्प
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद कोई भी शख्स, विदेशी नागरिक अपराधी के लिए राष्ट्रपति के दफ्तर या गृह मंत्रालय को दया याचिका भेज सकता है। इसके अलावा संबंधित राज्य के राज्यपाल को भी दया याचिका भेजी जा सकती है। राज्यपाल अपने पास आने वाली दया याचिकाओं को गृह मंत्रालय को भेज देते हैं।
जेल में चुपचाप रहती है शबनम
शबनम का डेथ वारंट का कभी भी जारी हो सकता है और शबनम को किसी भी वक्त फांसी पर लटकाया जा सकता है। रामपुर जेल सुपरिटेंडेंट का कहना है कि शबनम को आभास हो गया है कि मौत का फरमान कभी भी आ सकता है। आजकल वह जेल में वह चुपचाप रहती है। किसी से ज्यादा बात नहीं करती है। इससे पहले वह जेल की महिलाओं को सिलाई सिखाती थी और उनके बच्चों को भी पढ़ाती थी।
