बरेली: दो वार्डों के सीमा विवाद में फंसी सड़क, तीन साल से है उखड़ी

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी की सड़कों की हालत खराब है। पुराने शहर की कुंवर शाह मियां की दरगाह से कसाई टोला तक जाने वाली सड़क तीन साल से उखड़ी पड़ी है। गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। गड्ढों में गंदा पानी भरे रहने से पैदल निकलना मुश्किल है। नालियां भी चोक हैं जिसकी …

अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी की सड़कों की हालत खराब है। पुराने शहर की कुंवर शाह मियां की दरगाह से कसाई टोला तक जाने वाली सड़क तीन साल से उखड़ी पड़ी है। गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। गड्ढों में गंदा पानी भरे रहने से पैदल निकलना मुश्किल है।

नालियां भी चोक हैं जिसकी वजह से घरों का पानी टूटी सड़क के ऊपर बहता है। दोपहिया वाहन चालकों को भी हिचकोले खाते हुए मशक्कत से गुजरना पड़ता है। यह रास्ता दो मोहल्लों को जोड़ता है, इसलिए लोग यहां से ज्यादा निकलते हैं। मजबूरन लोग सकलैनी चौराहे से होते हुए शहर की तरफ जाते हैं।

कसाई टोला तक जाने वाली सड़क का निर्माण पिछले तीन सालों से दो वार्डों की सीमाओं के जाल में उलझकर रह गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले वार्ड चुनावों में सैलानी रोड के इस एरिया को दो वार्डों में बांट दिया गया था। विवादित सड़क के एक तरफ वार्ड 80 है और दूसरी तरफ वार्ड 78 है।

दोनों वार्डों की सीमाओं के बीच बनी यह सड़क लोगों की परेशानियों का सबब बनी हुई है। सड़क और उसके दोनों तरफ बनीं नालियां पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं लेकिन दोनों वार्डों के वार्ड मेंबर इसकी मरम्मत के काम से बच रहे हैं। सड़क और नालियां न होने की वजह से वहां के निवासियों का जीना दुश्वार हो गया है।

सड़क किनारे ही एक स्कूल भी संचालित है जिसमें पढ़ने वाले छोटे बच्चे भी उसी रास्ते से होकर स्कूल तक पहुंचते हैं। अक्सर बच्चों को कीचड़ और टूटी सड़क से गुजरकर स्कूल तक जाना पड़ता है। कई बार बच्चे कीचड़ में गिरने की वजह से चोटिल भी चुके हैं। वार्ड मेंबर और निगम से नाराज स्थानीय निवासियों ने बताया कि सड़क के ज्यादा टूटने के बाद मोहल्ले की निर्माणाधीन मस्जिद के मुहाने से मोहल्ले के लोगों ने ही मिट्टी और रोड़े डालकर कुछ दिन पहले थोड़ा भराव करा दिया था लेकिन अब वह भराव भी धंस गया है।

इस ओर न तो वार्ड पार्षद का ध्यान है और न ही नगर निगम का। कुछ समय पहले इस सड़क को बनवाने का प्रयास भी किया गया था लेकिन दोनों वार्ड के सीमा विवाद के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नगर निगम में कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।

जब भी हम सड़क की परेशानियों को लेकर वार्ड पार्षद के पास जाते हैं, निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। दोनों सभासद एक-दूसरे के ऊपर जिम्मेदारियों का ठीकरा फोड़कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
-हसमत

मोहल्ले में सफाई कर्मचारी झांकने तक नहीं आते हैं। नालियों के चोक होने की वजह से फैली गंदगी बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बनती आ रही है।
-अय्यूब

कीचड़ की वजह से मैं गिर गई थी जिसमें मेरा हाथ टूट गया था। हाथ आज तक ठीक नहीं हो पाया है लेकिन घर के काम और दवा की जरूरतों की वजह से बाहर निकलना पड़ता है। फिर से चोटिल होने का डर हमेशा बना रहता है।
-चंदा बी

मेरा दो माह का बच्चा है। अक्सर डाक्टर के पास जाना पड़ता है लेकिन घर के बाहर सड़क की हालत देखकर बच्चे को गोद में लेकर सड़क पार करने में भी डर लगता है। ऊपर से सड़क की ऐसी हालत देखकर ई-रिक्शा व ऑटो वाले भी दोगुना किराया वसूल करते हैं।
– मंतशा

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