बरेली: इस प्लान से सुधरेगा बरेली का वायु प्रदूषण, लिंक पर क्लिक कर पढ़ें इस प्लान के बारे में

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जगह-जगह पर होने वाली खुदाई से शहर की आबोहवा इस कदर जहरीली होती जा रही है कि आने वाले दिनों में खतरनाक हालातों को सामना करना पड़ सकता है। बीते दिनों ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के मामले में बरेली देश के 280 शहरों …

अमृत विचार, बरेली। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जगह-जगह पर होने वाली खुदाई से शहर की आबोहवा इस कदर जहरीली होती जा रही है कि आने वाले दिनों में खतरनाक हालातों को सामना करना पड़ सकता है। बीते दिनों ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के मामले में बरेली देश के 280 शहरों में 13वें नंबर पर है।

वहीं, प्रदेश की बात की जाए तो बरेली चौथे नंबर पर है। जहां की आबोहवा सबसे ज्यादा जहरीली होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के 22 शहरों में बरेली चौथे नंबर पर है। इस रिपोर्ट में 280 शहरों के वर्ष 2015 और 2016 के साल भर का औसत पार्टीकुलेट मेटर (पीएम10) के आंकड़े जुटाए।

बरेली का औसत पीएम 10 स्तर 226 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। बीते दिनों बेतरतीब खोदाई, परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन का उल्लंघन होने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ने से बरेली रेड जोन में भी आ गया था।

सरकार की ओर से प्रदूषित शहरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हवा शुद्ध करने की योजना बनाई जा रही है। ‘ग्रिड आधारित एक्शन प्लान’ के तहत शहर को दो किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर प्रदूषण फैलाने वाले कारकों से सबसे पहले निपटा जाएगा। इस मॉडल की शुरुआत कानपुर से होने जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार जल प्रदूषण में स्रोत की जानकारी होती है, लेकिन वायु प्रदूषण में स्रोत की जानकारी नहीं होती है। उत्सर्जन कहीं होता है और हवा के अनुरूप उसका असर कहीं और दिखाई देता है। अभी तक शहरों में किस स्रोत से कितना वायु प्रदूषण फैल रहा है। इसको लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं होती है।

माइक्रो लेवल पर एक्शन प्लान के जरिए इंडस्ट्री, वाहन, भवन निर्माण एवं विध्वंस, रोड डस्ट, घरेलू उत्सर्जन, अस्पताल, कचरा जलाने, होटल एवं रेस्तरां से होने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाया जाएगा। इस एक्शन प्लान के जरिए सबसे छोटी इकाई को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन किया जाएगा।

प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर कार्रवाई कर योजना को समय पर पूरा करने की तैयारी है। इसके तहत सबसे पहले उन ग्रिडों का चयन किया गया है। जहां से शहर में सबसे अधिक प्रदूषण फैल रहा है। इस प्लान के तहत वर्ष 2024 तक वायु प्रदूषण यानी पीएम 2.5 व पीएम 10 को 20 से 30 फीसद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रोहित सिंह ने बताया कि जिले में योजना का लाभ मिलने से वायू प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विभाग, नगर निगम, बरेली विकास प्राधिकरण, यातायात पुलिस, जिला उद्योग केंद्र, विद्युत विभाग, जिला पूर्ति विभाग, संभगाीय परिवहन अधिकारी, सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड विभाग शामिल हैं।

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