लखनऊ: एक बार फिर से बिजली दरों की बढ़ोतरी की कोशिश में कंपनियां

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लखनऊ, अमृत विचार। एक बार फिर से उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन की बिजली कंपनियां बिजली दरों में बढ़ोतरी की कोशिश में जुट गई हैं। बताया जा रहा है दरों में बढ़ोतरी के लिए कंपनियों द्वारा पूरी तरह से गुप्त रखकर काम को किया जा रहा है। वहीं कंपनियों की साजिश की जानकारी होने के बाद …

लखनऊ, अमृत विचार। एक बार फिर से उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन की बिजली कंपनियां बिजली दरों में बढ़ोतरी की कोशिश में जुट गई हैं। बताया जा रहा है दरों में बढ़ोतरी के लिए कंपनियों द्वारा पूरी तरह से गुप्त रखकर काम को किया जा रहा है। वहीं कंपनियों की साजिश की जानकारी होने के बाद दरों में बढ़ोतरी न हो सके, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद जुट गया है।

बता दें कि बिजली कंपनियों ने वर्ष 2021-22 वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए.आर.आर.) में लाइन हानियों को 16.64 फीसदी करके दिल्ली के अपटेल में बढ़ोतरी की कोशिश की है। जबकि पूर्व में नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2021-22 के लिये दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए.आर.आर.) को खरिज कर दिया गया था।

इस बात की जानकारी होने के बाद उपभोक्ता परिषद ने मंगलवार को विद्युत नियामक आयोग में एक लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर बिजली कंपनियों की दाखिल याचिका को खारिज करने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि यह विधिक मुद्दा है। आयोग कंपनियों के प्रस्ताव को खारिज कर सुमोटो कार्यवाही शुरू करे और प्रदेश के उपभोक्ताओं का जो पैसा कंपनियों पर निकल रहा, उसके बदले में बिजली दरों में 25 फीसदी की कमी कर हिसाब बराबर करे। उपभोक्ता परिषद द्वारा कुछ विधिक सवाल जो उठाए हैं उससे बिजली कंपनियों की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।

वर्ष 2019-20 व 2020-21 आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के खिलाफ कंपनियों ने नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है जो विचाराधीन है तो बिना फैसला आये बिजली कम्पनियो ने पुनः अपटेल में मुकदमा दाखिल कर दिया, जो एक संवैधानिक प्रक्रिया का खुला उलंघन है। दूसरी ओर जब आयोग ने बिजनेस प्लान में वर्ष 2021-22 के लिए वितरण हानिया 11.08 प्रतिशत अनुमोदित कर दिय है तो फिर ए.आर.आर. में उसे बढ़ाकर 16.64 फीसदी कैसे किया जा सकता है।

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