बरेली: साइकिल ने घोली नेपाल और भारत के बीच मिठास, दोनों देशों के झंडे लहराए एक साथ
अमृत विचार, बरेली। कभी किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक साइकिल दो देशों के आपसी संबंधों को और बेहतर करने में सफल होगी लेकिन साइकिल ने ऐसा कर दिखाया है। साइकिल ने दो देशों के बीच मिठास घोली है। इसको चलाने से पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। तमाम बीमारियां भी दूर …
अमृत विचार, बरेली। कभी किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक साइकिल दो देशों के आपसी संबंधों को और बेहतर करने में सफल होगी लेकिन साइकिल ने ऐसा कर दिखाया है। साइकिल ने दो देशों के बीच मिठास घोली है। इसको चलाने से पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। तमाम बीमारियां भी दूर रहती हैं। शहर के प्रदूषण को कम करने में भी कारगर होती है। यह कहना है बरेली के साइकिल बाबा (संजीव जिंदल) का।
उन्होंने नेपाल में एक इवेंट में 200 किलोमीटर तक साईकिल चलाई है। इसके लिए उन्हें नेपाल से आमंत्रित आया था। वहां से लौटने पर मंगलवार को संजीव ने बताया कि नेपाल में 5, 6 और 7 फरवरी को ‘टूर दी ठाकुर द्वार’ नाम से इवेंट का आयोजन हुआ था। जिसे नेपाल के नेपालगंज साइकिल क्लब की तरफ से कराया गया था।
इस इवेंट में साइकिलिंग का कुंभ लगता है। हजारों की संख्या में लोग एक साथ साइकिल चलाते हैं। इसमें साइकिल चलाने के लिए क्लब की तरफ से बरेली के साइकिल बाबा को आमंत्रित किया गया था। वह बताते हैं कि इस इवेंट में शामिल होने के लिए 4 फरवरी को ही बरेली से रवाना हो गए थे। पहले नेपाल तक अपनी गाड़ी से गए। उसके बाद साइकिल से आयोजन की जगह तक पहुंचे। नेपाल पहुंचते ही उन्होंने अपनी पीठ पर तिरंगा लहरा लिया था। वह पूरे इवेंट में शामिल हुए थे। तीन दिनों तक उन्होंने तिरंगे को नहीं उतारा। तिरंगे के साथ ही 200 किलोमीटर की यात्रा तय की।
इसी के साथ नेपाल के लोगों ने भी अपना झंडा तिरंगे के साथ लहराया। उन्होंने बताया कि जब दोनों देशों के तिरंगे एक साथ लहरा रहे थे तो भारत देश पर बाकई बहुत गर्व महसूस हो रहा था। उन्होंने बताया कि उनके साथ बरेली से दो लोग रविन्द्र ओबराय और मंजीत सिंह भी उनके साथ गए थे। वहां के लोगों की भी बहुत तारीफ की।
