बरेली: दो साल में 42 नसबंदी असफल, विभाग भरेगा हर्जाना
अमृत विचार, बरेली। परिवार नियोजन अभियान में महिला नसबंदी का अहम रोल है लेकिन इस बार इस बार चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पिछले वर्ष महिला नसबंदी फेल होने की 42 शिकायतें सामने आईं, जिसमें सिर्फ नौ जांच में सही पाई गईं। अब नौ महिलाओं को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जा रहा …
अमृत विचार, बरेली। परिवार नियोजन अभियान में महिला नसबंदी का अहम रोल है लेकिन इस बार इस बार चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पिछले वर्ष महिला नसबंदी फेल होने की 42 शिकायतें सामने आईं, जिसमें सिर्फ नौ जांच में सही पाई गईं। अब नौ महिलाओं को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों भी हैरान हैं कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर महिला नसबंदी कैसे फेल हो रही है।
जनसंख्या पर रोकथाम के लिए सरकार परिवार नियोजन को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में पुरुष और महिला नसबंदी पर सरकार प्रोत्साहन राशि भी देती है। सरकारी अस्पताल या इनपैनल्ड सेंटर पर नसबंदी कराने पर महिला को 1400 रुपये दिए जाते हैं जो उसके बैंक खाते में भेजे जाते हैं। कई बार नसबंदी फेल हो जाती है जो सरकार महिला को मुआवजा भी देती है। बीते साल सीएमओ आफिस में 25 महिलाओं ने आवेदन किया था कि उनकी नसबंदी फेल हो गई है। नसबंदी कराने के बाद भी वह गर्भवती हो गई हैं।
प्रत्येक शिकायत के बाद नियमानुसार डाक्टरों का पैनल बनाकर उसकी जांच कराई गई तो रिपोर्ट चौंकाने वाली मिली। इन 25 आवेदनों में से नौ महिलाएं की शिकायत सही निकली। सीएमओ आफिस से उनकी फाइल अब मुआवजे के लिए लखनऊ भेजी जा रही है और वहां से स्वीकृति के बाद ही मुआवजा दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में 1370 महिलाओं एवं तीन पुरुषों की नसबंदी, वर्ष 2020 में 1387 महिलाओं एवं तीन पुरुषों की नसबंदी हुई।
नसबंदी असफल हो तो मिलता है 30 हजार मुआवजा
नसबंदी फेल होने पर सरकार महिला को 30 हजार रुपये मुआवजा देती है। लेकिन इसके लिए कई तरह की औपचारिकता पूरी करनी होती है। शिकायत करने वाली महिला को लिखित में सीएमओ आफिस में शिकायत करनी होती है। उसकी शिकायत के बाद पहले उसके नसबंदी के दस्तावेज की जांच होती है और फिर डाक्टरों का पैनल बनाया जाता है। पैनल की रिपोर्ट में अगर उसकी शिकायत सही पाई जाती है तो फाइल आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ भेजी जाती है।
केस एक
कुआडांडा ब्लॉक के अदीनापुर गांव निवासी एक महिला ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी को चुनते हुए छह जुलाई 2016 को नसबंदी का ऑपरेशन कराया था। नसबंदी ऑपरेशन होने के बाद भी महिला के पेट में गर्भ ठहर गया। इसका सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो पेट में बच्चा पलने की पुष्टि हो गई।
बाद में महिला ने बेटी को जन्म दिया। जिस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में उन्होंने नसबंदी असफल होने की शिकायत दर्ज कराई। जिस पर महिला की फाइल शासन को भेजी गई, जांच में शुक्रवार को शिकायत सही पाई गई। उन्हें सीएमओ कार्यालय बुलाकर दस्तावेजों की पुष्टि कर बताया गया की सप्ताह भर के भीतर उनके खाते में 30 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
केस दो
कुआडांडा ब्लॉक के ही गांव भगवंतापुर निवासी एक महिला ने भी परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ताओं के सर्वेक्षण के दौरान नसबंदी कराने की हामी भर दी। उनके पति ने बताया कि 2019 में उनकी पत्नी की नसबंदी की गई। नसबंदी से पहले उनके तीन बच्चे थे। नसबंदी के बाद पुन: गर्भ ठहरने पर उन्होंने सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
नसबंदी फेल होने के दावे के बाद पैनल से जांच कराई गई है। जिनके दावे जांच में सही मिले हैं, उन्हें कार्यालय बुलाकर वैरिफाई किया जा रहा है। सभी नौ महिलाओं का मुआवजा सप्ताह भर में उनके बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। -पीएस आनंद , अपर शोध अधिकारी
